डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत से निर्यात होने वाले उत्पादों पर 26% टैरिफ लगाने के फैसले के बाद, भारत ने अब जवाबी रणनीति के तहत चतुराई से संतुलित रुख अपनाया है। हालांकि, भारत का फोकस फिलहाल सीधे तौर पर जवाबी शुल्क लगाने की बजाय द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को तेजी से अंतिम रूप देने पर है।
वैश्विक बाजारों पर टैरिफ का असर
ट्रंप के इस फैसले का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। वैश्विक बाजारों में भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा है।
सेंसेक्स में 1.6% की गिरावट आई है।
अमेरिकी नीति ने चीन, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों को भी झटका दिया है।
ट्रंप आदेश में राहत की संभावनाएं
भारत सरकार ट्रंप के हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश के एक विशेष प्रावधान पर भरोसा कर रही है।
इस प्रावधान के तहत उन देशों को राहत दी जा सकती है, जो व्यापार असंतुलन को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाते हैं।
भारत पहले ही अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत शुरू कर चुका है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
एशियाई देशों की प्रतिक्रिया
चीन ने 10 अप्रैल से सभी अमेरिकी आयातों पर 34% टैरिफ लगाने की घोषणा की है।
इंडोनेशिया ने जवाबी कार्रवाई से इनकार किया है।
वियतनाम ने संभावित व्यापार समझौते के तहत अपने टैरिफ शून्य करने की सहमति दी है।
भारत के लिए अच्छी और बुरी खबरें
भारत के लिए कुछ राहत की खबरें भी हैं:
सेमीकंडक्टर, तांबा और फार्मास्यूटिकल्स को टैरिफ से छूट मिली है।
भारत, अमेरिका में 50% से ज्यादा जेनेरिक दवाओं की सप्लाई करता है।
लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों में निर्यात प्रभावित हो सकता है।
राजनीतिक हमला और रणनीतिक चुप्पी
ट्रंप के टैरिफ फैसले के बाद, विपक्ष ने पीएम मोदी पर तीखा हमला बोला है।
राहुल गांधी ने कहा कि यह टैरिफ भारतीय अर्थव्यवस्था को तबाह कर देंगे, और ट्रंप-मोदी की ‘मित्रता’ का कोई लाभ नहीं मिला।
वहीं भारत सरकार ने आक्रामक प्रतिक्रिया देने की बजाय चतुर रणनीति को अपनाया है और बीटीए पर बातचीत को प्राथमिकता दी है।