भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते इन दिनों सतह पर भले सामान्य दिखें, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर तनाव की रेखाएं साफ नजर आ रही हैं। एक ओर अमेरिका चीन के साथ दुर्लभ खनिजों (rare minerals) और मैग्नेट्स की आपूर्ति को लेकर समझौते कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत से आयातित ऑटोमोबाइल्स और ऑटो पार्ट्स पर भारी टैरिफ लगाकर भारत पर दबाव बना रहा है।
भारत ने WTO में दर्ज की शिकायत
भारत ने अमेरिका के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन करार देते हुए विश्व व्यापार संगठन (WTO) में आधिकारिक शिकायत दर्ज कर दी है। भारत का कहना है कि ये शुल्क “सेफगार्ड मेजर्स” की श्रेणी में आते हैं, और अमेरिका ने WTO के सुरक्षा उपाय समझौते (Agreement on Safeguards – AoS) के तहत इन टैरिफ्स की जानकारी समिति को नहीं दी है।
अमेरिका ने किया सेफगार्ड आरोपों से इनकार
अमेरिका ने भारत के दावे को खारिज करते हुए कहा कि इन टैरिफ्स को कोई “सेफगार्ड” नहीं माना जा सकता और इसलिए WTO में विवाद समाधान की कोई बुनियाद नहीं बनती। अमेरिका के मुताबिक यह पूरी तरह घरेलू नीति का हिस्सा है।
आयात-निर्यात आंकड़ों से भारत की आपत्ति
भारत ने तर्क दिया है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए इन टैरिफ्स से उसके ऑटो सेक्टर को सीधा नुकसान हो रहा है। 2023 में अमेरिका ने कुल 89 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट्स का आयात किया, जिसमें मैक्सिको से 36 अरब डॉलर, चीन से 10.1 अरब डॉलर और भारत से केवल 2.2 अरब डॉलर के आयात हुए।
जवाबी शुल्क पर भी टकराव
भारत ने स्टील और एल्युमीनियम पर अमेरिकी टैरिफ के जवाब में अमेरिका से आयात होने वाले सेब, बादाम, नाशपाती, बोरिक एसिड, एंटी-फ्रीजिंग उत्पादों और कुछ स्टील आइटम्स पर जवाबी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था। अमेरिका ने इस पर भी कड़ा विरोध जताया। भारत का अनुमान है कि इन उपायों से अमेरिका से 7.6 अरब डॉलर का आयात प्रभावित होगा।