प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस 2025 पर ‘सुदर्शन चक्र’ स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने की घोषणा की थी।
इस प्रणाली का उद्देश्य दुश्मन के हमलों को बेअसर करना और सटीक जवाबी कार्रवाई करना है।
यह भगवान कृष्ण के पौराणिक अस्त्र ‘सुदर्शन चक्र’ से प्रेरित है।
लक्ष्य है कि 2035 तक सैन्य और नागरिक दोनों बुनियादी ढाँचों को सुरक्षा कवच प्रदान किया जाए।
रूस का योगदान और राजदूत का बयान
दिल्ली में रूस के प्रभारी राजदूत रोमन बाबुश्किन ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि रूस भारत की इस परियोजना में अहम भूमिका निभाएगा।
उन्होंने भारत को रूस का “विश्वसनीय रक्षा साझेदार” बताया।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा: “आपका मतलब सुदर्शन चक्र है?”
बाबुश्किन ने संकेत दिया कि रूस की उन्नत तकनीक और उपकरण इस प्रणाली का हिस्सा होंगे।
S-400 और ‘सुदर्शन चक्र’ की झलक
भारत पहले ही रूस से S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीद चुका है।
मई 2025 में पाकिस्तान के साथ चार दिन चली झड़प में इसने दुश्मन की मिसाइलें रोककर अपनी क्षमता साबित की।
भारतीय रक्षा हलकों में इसे “सुदर्शन चक्र” की उपमा दी गई।
मिशन ‘सुदर्शन चक्र’ की रूपरेखा
बहुस्तरीय राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचा।
2035 तक सैन्य ठिकाने, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, धार्मिक स्थल आदि पर पूर्ण वायु रक्षा कवच।
अनुसंधान, विकास और उत्पादन में पूर्ण स्वदेशीकरण पर बल।
भारत-रूस ऊर्जा और आर्थिक साझेदारी
राजदूत बाबुश्किन ने कहा कि अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद भारत-रूस ऊर्जा सहयोग जारी रहेगा।
रूस आज भारत का सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता है।
2024-25 में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 35.1% हो गई, जो 2019-20 में केवल 1.7% थी।
दोनों देश 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रख रहे हैं।
अमेरिकी प्रतिबंधों पर रूस का रुख
बाबुश्किन ने अमेरिकी प्रतिबंधों को “वैश्विक आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए हानिकारक” बताया।
उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा खरीद उसके राष्ट्रीय हित और बाज़ार की गतिशीलता से प्रेरित है।
रूस ने भरोसा जताया कि बाहरी दबाव के बावजूद भारत-रूस सहयोग और मज़बूत होगा।
आगे की राह
इस साल के अंत तक राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा संभावित है।
रक्षा और ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ ब्रिक्स की भूमिका भी वैश्विक परिदृश्य में बढ़ने की उम्मीद है।
राजदूत के अनुसार, भारत-रूस संबंध रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्र में और विस्तार की ओर बढ़ेंगे।