भारत ने चीन के दावे को पूरी तरह खारिज किया है कि बीजिंग ने इस साल की शुरुआत में भारत और पाकिस्तान के बीच मिलिट्री टकराव के दौरान मध्यस्थता की थी। भारत ने दोहराया कि सीज़फायर का निर्णय पूरी तरह दोनों देशों के DGMOs (Director General of Military Operations) की सीधे बातचीत का परिणाम था और इसमें कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं था।”हमने पहले ही ऐसे दावों का खंडन कर दिया है। भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।” – सूत्र, इंडिया टुडे
चीन के दावे का संदर्भ
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने एक कार्यक्रम में दावा किया कि बीजिंग ने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव सहित कई वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता की थी। उन्होंने कहा:
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से स्थानीय युद्ध और सीमा पार संघर्ष अधिक बार भड़के
भू-राजनीतिक उथल-पुथल फैलती रही
उत्तरी म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दा, भारत-पाक तनाव, फिलिस्तीन-इज़राइल और कंबोडिया-थाईलैंड संघर्ष में चीन ने मध्यस्थता की
मई 2026 का भारत-पाक तनाव
22 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम घाटी में आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए जवाबी कार्रवाई की
पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया
कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि चीन ने इस दौरान पाकिस्तान को रियल-टाइम निगरानी और अन्य सहायता दी, हालांकि भारतीय अधिकारियों का कहना है कि चीन की कोई सक्रिय भूमिका नहीं थी।
चीन और हथियार निर्यात
चीन का हथियार निर्यात पाकिस्तान के सैन्य हार्डवेयर का 81% से अधिक है
भारत का मानना है कि चीन ने इस संघर्ष का इस्तेमाल अपने हथियार प्रणालियों की क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए किया
भारत की प्रतिक्रिया
नई दिल्ली में घटनाक्रम से अवगत अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मई में भारत-पाक तनाव को समाप्त करने में चीन की कोई भूमिका नहीं थी।भारत की स्थिति: सीज़फायर पूरी तरह द्विपक्षीय बातचीत का परिणाम था, किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं हुई।