विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम और सैन्य तनाव में कमी दोनों देशों के बीच सीधे संवाद से संभव हुई थी, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से।
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत-पाक तनाव कम कराने में अमेरिका की अहम भूमिका रही है।
भारत का स्पष्ट संदेश: बातचीत सैन्य स्तर पर ही होगी
नीदरलैंड स्थित ब्रॉडकास्टर एनओएस को दिए इंटरव्यू में जयशंकर ने कहा कि भारत ने अमेरिका समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय को साफ बता दिया था कि अगर पाकिस्तान को संघर्षविराम चाहिए, तो उसे भारतीय सैन्य नेतृत्व से सीधे संपर्क करना होगा।
अमेरिकी संपर्क का स्वागत, लेकिन निर्णय भारत का अपना
जयशंकर ने बताया कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने तनाव के दौरान भारत से संपर्क किया था।
रुबियो ने खुद जयशंकर से बात की, जबकि वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क साधा।
जयशंकर ने कहा कि ऐसी कूटनीतिक पहल स्वाभाविक हैं, लेकिन भारत ने स्पष्ट रुख अपनाया कि निर्णय सीधा सैन्य संवाद से ही होगा।
10 मई को पाक सेना ने की संपर्क की पहल
जयशंकर ने पुष्टि की कि दोनों सेनाओं के बीच आधिकारिक सैन्य हॉटलाइन के माध्यम से संपर्क हुआ था।
उन्होंने बताया:“10 मई को पाकिस्तानी सेना ने संदेश भेजा कि वे गोलीबारी रोकने के लिए तैयार हैं, और हमने उसी के अनुरूप जवाब दिया।”
ऑपरेशन सिंदूर के बाद झुका पाकिस्तान
विदेश मंत्री ने कहा कि यह युद्धविराम भारत की सख्त सैन्य कार्रवाई—ऑपरेशन सिंदूर—के बाद आया, जो 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था। उस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी।
अमेरिका की भूमिका सीमित, निर्णय भारत का
भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका की भूमिका को लेकर सवाल पर जयशंकर ने कहा:“हां, अमेरिका अपने स्तर पर बात कर रहा था। रुबियो और वेंस ने हमसे भी बात की और पाकिस्तान से भी। खाड़ी के कुछ देशों ने भी संवाद किया। लेकिन भारत ने अपनी नीति स्पष्ट रखी — निर्णय हमारा होगा, हमारी शर्तों पर होगा।”