पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ऐतिहासिक जीत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार का असर अब पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी दिखने लगा है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने इस सत्ता परिवर्तन का स्वागत करते हुए इसे तीस्ता जल-बंटवारा समझौते के लिए नई उम्मीद बताया है।
BNP की प्रतिक्रिया और उम्मीदें
BNP ने भारत-बांग्लादेश के बीच शांतिपूर्ण संबंधों के जारी रहने की उम्मीद जताई है।
पार्टी के सूचना सचिव अज़ीज़ुल बारी हेलाल ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में BJP के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि इससे दोनों क्षेत्रों के रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं।
तीस्ता समझौते पर प्रगति की उम्मीद
BNP का मानना है कि नई BJP सरकार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के साथ बेहतर तालमेल बनाकर तीस्ता समझौते को आगे बढ़ा सकती है।
उनके अनुसार, यह बदलाव ढाका और कोलकाता के बीच लंबे समय से लंबित मुद्दों को सुलझाने में मददगार साबित हो सकता है।
तीस्ता समझौता क्या है?
तीस्ता जल-बंटवारा समझौता भारत और बांग्लादेश के बीच एक महत्वपूर्ण और लंबे समय से लंबित मुद्दा है।
तीस्ता नदी सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है, और इसका पानी दोनों देशों के लिए बेहद अहम है।
2011 का प्रस्तावित फार्मूला
2011 में एक अंतरिम समझौते का मसौदा तैयार किया गया था, जिसके तहत:
भारत को 42.5% पानी
बांग्लादेश को 37.5% पानी
20% पानी पर्यावरण के लिए सुरक्षित रखने का प्रस्ताव था
लेकिन इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो सके।
ममता बनर्जी की आपत्ति
पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस समझौते का विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे उत्तर बंगाल में पानी की कमी हो सकती है, जिससे पीने के पानी और सिंचाई पर असर पड़ेगा।
राजनीतिक और कूटनीतिक संवेदनशीलता
बांग्लादेश लंबे समय से इस समझौते की मांग करता रहा है, क्योंकि उसके उत्तरी क्षेत्रों में सिंचाई और आजीविका के लिए तीस्ता का पानी बेहद जरूरी है।
हालांकि, यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि किसी भी समझौते के लिए पश्चिम बंगाल की सहमति आवश्यक मानी जाती है।
आगे क्या?
बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब यह देखना अहम होगा कि क्या वास्तव में तीस्ता समझौते पर कोई ठोस प्रगति होती है या नहीं। फिलहाल, BNP की उम्मीदों ने इस मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।