दिल्ली की कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामले में Delhi High Court ने महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए Arvind Kejriwal, Manish Sisodia और 21 अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया है।
यह नोटिस Central Bureau of Investigation (सीबीआई) की उस याचिका पर जारी किया गया, जिसमें निचली अदालत द्वारा आरोपियों को बरी करने के आदेश को चुनौती दी गई है।
CBI ने हाईकोर्ट में क्या कहा
सीबीआई की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने अदालत को बताया कि आबकारी नीति से जुड़ा मामला देश के सबसे बड़े घोटालों में से एक हो सकता है और इसमें भ्रष्टाचार के स्पष्ट संकेत मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को बिना पूरी तरह से सुनवाई किए ही बरी कर दिया, जो उचित नहीं है।
सीबीआई के मुताबिक जांच के दौरान ऐसे कई सबूत सामने आए हैं जो शराब नीति में कथित हेरफेर, साजिश और रिश्वतखोरी की ओर इशारा करते हैं। एजेंसी का कहना है कि इन सबूतों और गवाहों को निचली अदालत ने पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
निचली अदालत ने क्या कहा था
पिछले सप्ताह दिल्ली की एक विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि जांच के दौरान जुटाए गए सबूत यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं कि नीति को छिपाने, पक्षपात करने या संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का कोई स्पष्ट मामला बनता है।
यह फैसला विशेष न्यायाधीश Jitendra Singh की अदालत ने सुनाया था, जो सीबीआई द्वारा दर्ज आबकारी नीति मामले की सुनवाई कर रहे थे।
अपने लगभग 598 पृष्ठों के आदेश में अदालत ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों से यह संकेत मिलता है कि नीति निर्माण की प्रक्रिया परामर्श, संवाद और प्रशासनिक सावधानी के साथ की गई थी।
किन-किन लोगों के खिलाफ चल रहा है मामला
इस मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया के अलावा K. Kavitha और करीब 20 अन्य लोग भी आरोपी हैं।
सीबीआई का आरोप है कि आबकारी नीति में बदलाव के दौरान कुछ सिफारिशों को नजरअंदाज किया गया। अभियोजन पक्ष का कहना है कि रवि धवन समिति की रिपोर्ट में नीति से जुड़ी कई विसंगतियों का जिक्र किया गया था, जिसे अनदेखा किया गया।
नीति को लेकर अदालत की टिप्पणी
निचली अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि नई आबकारी नीति का उद्देश्य पिछली नीति में मौजूद समस्याओं को दूर करना था।
अदालत के अनुसार, नीति में वितरण मार्जिन में सुधार और बाजार में मौजूद एकाधिकार की प्रवृत्तियों को खत्म करने जैसे कदम शामिल थे।
अब इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद ही यह तय होगा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा या मामले में आगे कानूनी कार्रवाई होगी।