7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल में हमास द्वारा किया गया आतंकी हमला और 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ हमला — इन दोनों हमलों में दो महत्वपूर्ण समानताएं देखी गईं:
दोनों हमले पर्यटकों को निशाना बनाकर किए गए।
दोनों हमले एक विशेष धर्म को मानने वाले लोगों पर केंद्रित थे।
इज़राइल में यहूदी समुदाय और पहलगाम में हिंदू पर्यटक आतंकियों के निशाने पर थे। ये घटनाएं महज संयोग नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे एक गहरा और रणनीतिक संबंध हो सकता है — पाकिस्तान और हमास के बीच सहयोग।
हमास नेताओं का पाकिस्तान दौरा और ट्रेनिंग
पिछले एक साल में हमास के वरिष्ठ नेताओं ने कई बार पाकिस्तान का दौरा किया। हाल ही में हमास की एक टीम ने बहावलपुर स्थित जैश-ए-मुहम्मद के मुख्यालय और पाकिस्तानी सेना के एक प्रशिक्षण केंद्र का दौरा किया, जिसका उद्घाटन खुद सेना प्रमुख असीम मुनीर ने किया था। यह केंद्र राजस्थान की सीमा के पास रणनीतिक रूप से बेहद अहम है।
अमेरिकी विशेषज्ञ की चेतावनी
पेंटागन के पूर्व अधिकारी माइकल रुबिन का मानना है कि पहलगाम हमला और हमास का इज़राइल पर हमला रणनीति के लिहाज़ से समान हैं।
रुबिन के अनुसार:
दोनों हमलों में “सबसे उदार” वर्ग को निशाना बनाया गया — इज़राइल में शांति की पक्षधर यहूदी, और पहलगाम में छुट्टियाँ मना रहे मध्यमवर्गीय हिंदू।
पाकिस्तान अब हमास जैसी रणनीति अपना रहा है, जो स्पष्ट रूप से धार्मिक आतंकवाद का संकेत है।
उन्होंने भारत से आग्रह किया कि वह इज़राइली स्टाइल में जवाबी कार्रवाई करे और ISI को एक आतंकवादी संगठन के रूप में मान्यता दे।
भारत की प्रतिक्रिया: कूटनीतिक और सख्त
हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं।
पाकिस्तान के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स निलंबित किए गए।
सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया गया।
राजनयिक संबंधों में कटौती की गई और सैन्य अधिकारियों को निष्कासित किया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि हमले का बदला लिया जाएगा।
मोदी सरकार के पिछले रिकॉर्ड (उरी के बाद सर्जिकल स्ट्राइक, पुलवामा के बाद एयर स्ट्राइक) को देखते हुए यह माना जा रहा है कि पहलगाम का जवाब भी तय है — और शायद इस बार इज़राइल की तर्ज़ पर।