प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी पर जानलेवा हमला करने वाले हादी मतार को अमेरिकी अदालत ने दोषी ठहराते हुए 25 साल की जेल की सजा सुनाई है। यह हमला अगस्त 2022 में न्यूयॉर्क के चाटौक्वा इंस्टीट्यूट में उस वक्त हुआ था जब रुश्दी व्याख्यान देने वाले थे।
हमले के परिणाम
इस हमले में 77 वर्षीय लेखक की एक आंख की रोशनी चली गई और उन्हें सिर और धड़ में कई बार चाकू मारा गया। मंच पर मौजूद एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ। रुश्दी हमले के वक्त मौजूद नहीं थे लेकिन उन्होंने एक वक्तव्य के जरिए घटना को “मृत्यु का अनुभव” बताया।
कोर्ट की कार्यवाही और सजा
सजा का विवरण
27 वर्षीय हादी मतार को हत्या के प्रयास और हमले के आरोप में फरवरी में दोषी ठहराया गया। कोर्ट ने उसे रुश्दी पर हमले के लिए 25 साल और अन्य घायल व्यक्ति के लिए 7 साल की सजा सुनाई, जो साथ-साथ चलेगी।
अभियोजन का पक्ष
चाटौक्वा काउंटी के डीए जेसन श्मिट ने कहा कि मतार ने जानबूझकर यह हमला अधिकतम नुकसान पहुँचाने की नीयत से किया। घटना के दौरान 1,400 दर्शकों की सुरक्षा भी खतरे में थी।
बचाव पक्ष की दलीलें
मतार के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल पहले कभी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं रहा और 12 साल की सजा की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि दर्शकों को कोई नुकसान नहीं हुआ।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमलावर की टिप्पणी
सजा से पहले हादी मतार ने रुश्दी को “पाखंडी” बताते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को आधार बनाकर उन्हें दोषी ठहराया। उसने स्वीकारा कि रुश्दी को वह पसंद नहीं करता और उन पर हमले की योजना खुद बनाई थी।
फतवा और धार्मिक कट्टरता की पृष्ठभूमि
1989 का फतवा
अभियोजकों के अनुसार, यह हमला 1989 में ईरानी नेता अयातुल्ला खुमैनी द्वारा रुश्दी की किताब The Satanic Verses पर जारी किए गए फतवे की प्रेरणा से किया गया। हालाँकि ईरान सरकार ने वर्षों बाद फतवे से पल्ला झाड़ लिया था।
मतार का दावा
मतार ने ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ को दिए इंटरव्यू में कहा कि उसने अकेले यह हमला किया और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड से उसका कोई संबंध नहीं था। उसने कहा कि वह अयातुल्ला खुमैनी को “अच्छा व्यक्ति” मानता है, लेकिन फतवे का पालन नहीं कर रहा था।
रुश्दी की प्रतिक्रिया और आत्मकथा
हमले के बाद रुश्दी ने करीब पाँच सप्ताह अस्पताल और रिहैब सेंटर में बिताए। 2024 में उन्होंने अपनी आत्मकथा Knife में हमले और उसके बाद के जीवन की व्याख्या की।
विवादों में घिरे लेखक
सलमान रुश्दी को उनकी विवादास्पद लेखनी के कारण अक्सर इस्लामिक देशों से आलोचना झेलनी पड़ी है। इसके बावजूद वे अपने विचारों और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर अडिग रहे हैं और वर्तमान में लंदन में रह रहे हैं।