NATIONAL THOUGHTS

A Web Portal Of Positive Journalism 

गुरु प्रदोष व्रत 2025: शिव जी की कृपा पाने का शुभ अवसर

Share This Post

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और प्रत्येक त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जब यह व्रत गुरुवार को पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन शिव जी की आराधना करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

गुरु प्रदोष व्रत कब रखा जाता है?

प्रदोष व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। उपवास और पूजन करने से महादेव प्रसन्न होकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं।

गुरु प्रदोष व्रत में क्या खाएं?

गुरु प्रदोष व्रत में फलाहार किया जाता है। व्रत रखने वाले भक्त निम्नलिखित चीजों का सेवन कर सकते हैं:

संतरा, केला, सेब और हरी मूंग जैसी फलाहारी चीजें

दूध, दही, नारियल पानी

सिंघाड़े का हलवा, साबूदाना की खिचड़ी

कुट्टू के आटे की पूड़ी और समा चावल की खीर

सूखे मेवे इस व्रत में लहसुन-प्याज, मांसाहार, शराब, अनाज, लाल मिर्च और सादा नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।

गुरु प्रदोष व्रत में क्या करें?

सच्ची श्रद्धा और भक्ति से व्रत के नियमों का पालन करें।

गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें।

घर और मंदिर में सफाई रखें और पवित्र वातावरण बनाएं।

किसी से विवाद न करें और नकारात्मक विचारों से बचें।

भगवान शिव की पूजा में केतकी के फूल और टूटे हुए चावल अर्पित न करें।

गुरु प्रदोष व्रत पर क्या दान करें?

फलों, वस्त्रों और अन्न का दान करें।

दूध और काले तिलों का दान करें।

गौदान (गाय का दान) करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

गुरु प्रदोष व्रत पर इन मंत्रों का जाप करें

ॐ नमः शिवाय

ॐ महादेवाय नमः

ॐ पार्वती नमः

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

गुरु प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा

प्राचीन कथा के अनुसार, असुरों के राजा वृत्तासुर ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवताओं ने देवगुरु बृहस्पति से मार्गदर्शन मांगा। उन्होंने बताया कि वृत्तासुर पहले राजा चित्ररथ था, जिसने भगवान शिव का उपहास किया था, जिससे माता पार्वती क्रोधित हो गईं और उसे राक्षस बनने का श्राप दिया।

देवगुरु ने देवताओं को गुरु प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। इस व्रत के प्रभाव से भगवान शिव प्रसन्न हुए और देवराज इंद्र ने वृत्तासुर को पराजित कर दिया। इसलिए, यह व्रत शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है।

गुरु प्रदोष व्रत का पारण कैसे करें?

प्रदोष व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद स्नान करके पूजा-पाठ करने के बाद किया जाता है। इस वर्ष गुरु प्रदोष व्रत का पारण 28 मार्च 2025 को किया जाएगा।

गुरु प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।

पूजा स्थल पर शिवलिंग स्थापित करें और जल, बेलपत्र, आक के फूल, गुड़हल और मदार के फूल चढ़ाएं।

शिव मंत्रों का जाप करें, जैसे ॐ नमः शिवाय और ॐ त्र्यम्बकं यजामहे।

गुरु प्रदोष व्रत कथा पढ़ें या सुनें।

पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और भोग अर्पित करें।

व्रत का पारण अगले दिन करें।

गुरु प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त

गुरु प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त: 27 मार्च 2025, सायं 6:35 बजे से रात्रि 8:57 बजे तक। इस समय में पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

गुरु प्रदोष व्रत का पालन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *