पंजाब-हरियाणा सीमाओं पर डेरा डाले किसानों ने शुक्रवार को अपनी मांगों को लेकर संसद तक विरोध मार्च फिर से शुरू करने का ऐलान किया है। 101 किसानों का जत्था, किसान नेताओं सुरजीत सिंह फूल, सतनाम सिंह पन्नू, सविंदर सिंह चौटाला, बलजिंदर सिंह चडियाला और मंजीत सिंह के नेतृत्व में, शंभू बॉर्डर से दिल्ली की ओर कूच करेगा।
एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग
किसान मुख्य रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे अन्य मुद्दों पर भी सरकार से जवाब चाहते हैं। किसान नेता सरवन सिंह पंढेर शंभू सीमा पर ही रहेंगे और जत्थे का नेतृत्व नहीं करेंगे।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
इंटरनेट सेवाएं निलंबित: हरियाणा के अंबाला जिले में 9 दिसंबर तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
भारी बैरिकेडिंग: पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर सीमाओं पर कड़ी बैरिकेडिंग की है और पर्याप्त बल तैनात किए हैं।
धारा 144 लागू: अंबाला प्रशासन ने पांच या अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी है।
पैदल मार्च का फैसला
किसानों ने इस बार ट्रैक्टर के बजाय पैदल मार्च करने का निर्णय लिया है। किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा, “हम पिछले आठ महीने से यहाँ डटे हुए हैं। सरकार द्वारा हमारे ट्रैक्टर पर संशोधन के आरोपों को देखते हुए हमने पैदल मार्च करने का निर्णय लिया है।”
खाप पंचायतों और व्यापारियों का समर्थन
किसान आंदोलन को खाप पंचायतों और व्यापारिक समुदाय से समर्थन मिला है। इससे पहले भी किसान 13 और 21 फरवरी को दिल्ली कूच का प्रयास कर चुके हैं। किसानों का यह मार्च सरकार पर दबाव बनाने का एक और प्रयास है। एमएसपी की कानूनी गारंटी और अन्य मांगों को लेकर किसानों की आवाज बुलंद है। दिल्ली कूच के साथ एक बार फिर आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है।