संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi के खिलाफ लाए जाने वाले प्रस्ताव को फिलहाल वापस लेने का फैसला किया है।
यह प्रस्ताव पूर्व सेना प्रमुख M. M. Naravane के अप्रकाशित संस्मरण और राहुल गांधी द्वारा बजट भाषण के दौरान की गई टिप्पणियों से जुड़ा था।
निशिकांत दुबे के प्रस्ताव के बाद बदला फैसला
रिजिजू ने बताया कि भाजपा सांसद Nishikant Dubey ने लोकसभा में एक सारगर्भित प्रस्ताव पेश किया है। इसी के बाद सरकार ने अपना अलग प्रस्ताव लाने का निर्णय वापस ले लिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सांसद सदन में प्रस्ताव ला सकता है। चूंकि दुबे का मुख्य प्रस्ताव स्वीकार हो चुका है, इसलिए अब सरकार आगे की रणनीति अध्यक्ष से परामर्श के बाद तय करेगी।
विशेषाधिकार या आचार समिति को भेजा जा सकता है मामला
रिजिजू के मुताबिक, प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद यह तय किया जाएगा कि मामले को विशेषाधिकार समिति या आचार समिति को भेजा जाए, या फिर सीधे सदन में चर्चा के लिए लाया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने नियमों का उल्लंघन करते हुए एक अप्रकाशित पुस्तक का उल्लेख किया और बजट भाषण में सरकार व प्रधानमंत्री पर अनुचित टिप्पणियां कीं।
लोकसभा अध्यक्ष को पत्र
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई जब निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को पत्र लिखकर राहुल गांधी के हालिया भाषण की जांच के लिए एक विशेष संसदीय समिति गठित करने की मांग की।
पत्र में दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का आचरण संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं है और इसकी जांच आवश्यक है।
फोर्ड फाउंडेशन पर आरोप
अपने पत्र में दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी कथित तौर पर Ford Foundation से जुड़े हुए हैं और उनकी विदेश यात्राओं के वित्तपोषण को लेकर भी सवाल उठाए।
हालांकि इन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है।