नया साल शुरू हो चुका है और लोग अपने नव-संकल्पों के प्रति प्रतिबद्ध दिखाई दे रहे हैं। लेकिन यह संकल्प तभी पूरा हो सकता है जब कार्य-जीवन संतुलन सही हो। कार्य-जीवन संतुलन को लेकर कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं, और इस चर्चा में हाल ही में एक नया बयान सामने आया है, जो गौतम अडानी का है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
गौतम अडानी का वर्क-लाइफ बैलेंस पर दृष्टिकोण
अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने अपने वीडियो में कहा कि कार्य और व्यक्तिगत जीवन के बीच सामंजस्यपूर्ण संतुलन हर व्यक्ति का व्यक्तिगत निर्णय होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कोई व्यक्ति अपने परिवार के साथ चार घंटे बिता कर खुश है, तो यह उसका संतुलन है। वहीं, यदि कोई आठ घंटे बिता कर खुश है, तो यह उसका निर्णय है।
“8 घंटे घर पर रहोगे तो बीवी भाग जाएगी”
गौतम अडानी ने इस विषय पर मजाक करते हुए कहा कि अगर आप आठ घंटे घर पर बिताएंगे तो आपकी बीवी भाग जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन नश्वर है और यदि व्यक्ति इसे सही से नहीं जीता तो वह जीवन जीने में कठिनाई महसूस करता है।
कार्य-जीवन संतुलन का सही मायने
गौतम अडानी ने आगे कहा कि कार्य-जीवन संतुलन का असली सार आपसी खुशी में निहित है। उनका मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को अपनी पसंद से खुशी मिलती है और वह दूसरे को भी खुश कर पाता है, तो यही संतुलन की सही परिभाषा है।
नारायण मूर्ति की 70 घंटे कार्य सप्ताह पर टिप्पणी
गौतम अडानी की टिप्पणी इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति के 70 घंटे कार्य सप्ताह वाली टिप्पणी के बाद आई है। मूर्ति ने युवा पीढ़ी से लंबे कार्य घंटे अपनाने की वकालत की थी, जिसके बाद इस विषय पर बहस छिड़ गई थी। मूर्ति की टिप्पणियों को मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिली थीं, जहां कुछ ने इसे सराहा तो अन्य ने इसे अव्यवहारिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया था।
कार्य-जीवन संतुलन पर अलग-अलग विचार
कार्य-जीवन संतुलन के मुद्दे पर पुरानी पीढ़ी और युवा पीढ़ी के विचारों में अंतर है। जहां पुरानी पीढ़ी कड़ी मेहनत और लंबे समय तक काम करने को प्राथमिकता देती है, वहीं युवा पेशेवर लचीलेपन, मानसिक स्वास्थ्य और प्रियजनों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय को अधिक महत्व देते हैं। गौतम अडानी का दृष्टिकोण एक मध्य मार्ग प्रदान करता है, जिसमें व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर संतुलन को परिभाषित करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
इस प्रकार, गौतम अडानी के विचार कार्य-जीवन संतुलन पर एक महत्वपूर्ण पहलू को उजागर करते हैं, जो व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और परिस्थितियों पर आधारित है।