हर साल गणेश महोत्सव भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होता है। यह पर्व पूरे देश में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर भक्तजन गणपति बप्पा की भक्ति और श्रद्धा से पूजा करते हैं।
भक्त अपने घरों में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर विशेष पूजन-अर्चन करते हैं। सनातन धर्म शास्त्रों के अनुसार भगवान गणेश की पूजा से आर्थिक संकट दूर होते हैं, तथा सुख, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
यदि आप भी गणपति बप्पा को प्रसन्न करना चाहते हैं तो पूजा के समय विशेष मंत्रों का जाप अवश्य करें।
भगवान गणेश के प्रमुख मंत्र
विघ्न विनाशक मंत्र
ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा॥
गणेश द्वादशनाम स्तोत्र
गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः।
द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः॥
विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्॥
विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत् क्वचित्॥
समृद्धि प्रदायक मंत्र
ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥
लक्ष्मी गणेश स्तुति
दन्ताभये चक्रवरौ दधानं, कराग्रगं स्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जयालिङ्गितमाब्धि पुत्र्या-लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे॥
ऋण मुक्ति मंत्र
ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट्॥
धन प्राप्ति मंत्र
ॐ नमो ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं क्लीं क्लीं श्रीं लक्ष्मी मम गृहे धनं देही चिन्तां दूरं करोति स्वाहा॥
गणेश वंदना
वन्दे गजेन्द्रवदनं वामाङ्कारूढवल्लभाश्लिष्टम्।
कुङ्कुमरागशोणं कुवलयिनीजारकोरकापीडम्॥
विघ्नान्धकारमित्रं शङ्करपुत्रं सरोजदलनेत्रम्।
सिन्दूरारुणगात्रं सिन्धुरवक्त्रं नमाम्यहोरात्रम्॥
संतान गणपति स्तोत्र
नमोऽस्तु गणनाथाय सिद्धी बुद्धि युताय च।
सर्वप्रदाय देवाय पुत्र वृद्धि प्रदाय च।।
गुरु दराय गुरवे गोप्त्रे गुह्यासिताय ते।
गोप्याय गोपिताशेष भुवनाय चिदात्मने।।
विश्व मूलाय भव्याय विश्वसृष्टि करायते।
नमो नमस्ते सत्याय सत्य पूर्णाय शुण्डिने।।
एकदन्ताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः।
प्रपन्न जन पालाय प्रणतार्ति विनाशिने।।
शरणं भव देवेश सन्तति सुदृढ़ां कुरु।
भविष्यन्ति च ये पुत्रा मत्कुले गण नायक।।
ते सर्वे तव पूजार्थम विरता: स्यु:रवरो मत:।
पुत्रप्रदमिदं स्तोत्रं सर्व सिद्धि प्रदायकम्।।