आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समिट को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच Bharatiya Janata Party (BJP) ने कांग्रेस और देश के प्रथम प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पार्टी ने दावा किया कि नेहरू के कार्यकाल में देश की सुरक्षा और हितों के साथ समझौता किया गया।
‘नेहरू के कार्यालय में सक्रिय थे विदेशी जासूस’
नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पार्टी सांसद Sambit Patra ने आरोप लगाया कि नेहरू काल में भारत का सचिवालय विदेशी खुफिया एजेंसियों के प्रभाव में था।
पात्रा ने दावा किया कि नेहरू के विशेष सहायक एम.ओ. मथाई को अमेरिकी एजेंट के रूप में जाना जाता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 1960 के दशक में सोवियत संघ की खुफिया एजेंसी KGB के एजेंट भी प्रधानमंत्री कार्यालय में सक्रिय थे।
उन्होंने कहा कि उस दौर में विदेशी शक्तियों को आवश्यक दस्तावेज कथित तौर पर आसानी से उपलब्ध हो जाते थे।
तिब्बत और चीन नीति पर आरोप
पात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि पंचशील समझौते के तहत तिब्बत को चीन के हवाले कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि अक्साई चिन में चीन द्वारा सड़क निर्माण की जानकारी मिलने के बावजूद पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध में भारत की हार के लिए भी नेहरू की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया और ‘फॉरवर्ड पॉलिसी’ को गलत निर्णय बताया।
बेरुबारी मुद्दे पर सवाल
BJP नेता ने पश्चिम बंगाल के बेरुबारी क्षेत्र का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की राय के बावजूद 9वें संविधान संशोधन के माध्यम से यह क्षेत्र पाकिस्तान को सौंपा गया।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार
इन आरोपों के बीच कांग्रेस की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। AI समिट विवाद के बीच यह बयानबाजी सियासी माहौल को और गरमा रही है।