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Falgu Nadi Story: पिंडदान का महत्व: फल्गु नदी की पौराणिक कथा

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नई दिल्ली,(नेशनल थॉट्स ) – पिंडदान और श्राद्ध हिंदू संस्कृति में गहरा महत्व रखते हैं। इसके तहत फल्गु नदी के किनारे किए गए श्राद्ध को भी विशेष महत्व दिया जाता है। यह कहा जाता है कि इस नदी के किनारे किए गए श्राद्ध से पूर्वजों के लिए स्वर्ग का रास्ता खुलता है, यह मान्यता है। हालांकि इसी नदी को श्रापित भी माना जाता है। बिहार के गया जिले में स्थित फल्गु नदी के बारे में कहते हैं कि इसे सीता माता ने श्राप दिया था। आइए इसकी पौराणिक कथा को जानते हैं.


कथा: फल्गु नदी का श्राप


एक कथा के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण, और माता सीता दशरथ के लिए श्राद्ध करने गए थे। वहां पहुंचकर राम और लक्ष्मण ने श्राद्ध की तैयारियों में लग जाते हैं, लेकिन किसी कारणवश माता सीता ने जल्दी ही दशरथ का श्राद्ध कर दिया। विशेष रूप से, स्थल पुराण की कथा के अनुसार राजा दशरथ का श्राद्ध उनके छोटे बेटों भरत और शत्रुघ्न ने किया था। लेकिन दशरथ को सबसे ज्यादा प्रिय थे उनके बड़े बेटे राम, इसलिए दशरथ की चिता की राख उड़कर फल्गु नदी के किनारे पहुंच गई, जहां तब माता सीता ही मौजूद थी।

नदी को माना था साक्षी


इस वक्त सीता माता ने फल्गु नदी की रेत से पिंड बनाया और पिंडदान किया। इस पिंडदान के दौरान, माता सीता ने नदी को साक्षी मानकर उसके किनारे पर एक ब्राह्मण, गाय, तुलसी, अक्षयवट आदि को बनाया। लेकिन जब भगवान राम और लक्ष्मण वापस आए और श्राद्ध के बारे में पूछा, तो फल्गु नदी ने उनके गुस्से से बचने के लिए झूठ बोल दिया। तब माता सीता गुस्से में आकर नदी को श्राप दिया और उसके बाद से यह नदी भूमि के नीचे बहती है, इसलिए इसे भू-सलिला भी कहा जाता है।

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