यह रिएक्टर यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (MOX) ईंधन पर चलता है।
यह ईंधन छोटे-छोटे सिरेमिक पेलेट्स के रूप में होता है, जिन्हें यूरेनियम और प्लूटोनियम के ऑक्साइड को मिलाकर बनाया जाता है।
इसमें मौजूद प्लूटोनियम, पहले चरण के रिएक्टरों से निकले ‘स्पेंट फ्यूल’ से प्राप्त किया जाता है।
इन पेलेट्स को रिएक्टर के ‘कोर’ में रखा जाता है, जहां परमाणु विखंडन (फिशन) होता है।
कैसे बनता है नया ईंधन? (ब्रीडर तकनीक)
रिएक्टर के कोर के चारों ओर यूरेनियम-238 की एक परत (ब्लैंकेट) होती है।
यूरेनियम-238 प्राकृतिक रूप से प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, लेकिन सामान्यतः निष्क्रिय होता है।
जब तेज़ न्यूट्रॉन इस परत से टकराते हैं, तो यह प्लूटोनियम में बदल जाता है।
इस नए प्लूटोनियम को निकालकर फिर से ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
यही वजह है कि PFBR जैसे रिएक्टर को ‘ब्रीडर’ कहा जाता है—क्योंकि यह जितना ईंधन खपत करता है, उससे ज्यादा पैदा करता है।
भारत की बड़ी उपलब्धि
PFBR के पूरी तरह चालू होने के बाद भारत रूस के बाद दूसरा देश बन जाएगा, जिसके पास व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर होगा।
इसे कल्पक्कम स्थित इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च (IGCAR) ने डिजाइन किया है।
यह पूरी तरह स्वदेशी परियोजना है, जिसमें 200 से अधिक भारतीय उद्योगों का योगदान रहा है।
‘क्रिटिकैलिटी’ क्या होती है?
क्रिटिकैलिटी वह अवस्था है, जब रिएक्टर में चेन रिएक्शन अपने आप स्थिर रूप से चलने लगती है।
हर फिशन से निकलने वाले न्यूट्रॉन अगली फिशन प्रक्रिया को जारी रखते हैं।
न यह रिएक्शन बढ़ती है, न घटती—बल्कि संतुलित बनी रहती है।
यह बिजली उत्पादन नहीं है, बल्कि रिएक्टर के सफल संचालन की पहली और सबसे जरूरी शर्त है।
आगे क्या होगा?
क्रिटिकैलिटी हासिल करने के बाद अब रिएक्टर पर कम पावर के कई परीक्षण किए जाएंगे।
इन परीक्षणों के बाद ही इसे बिजली ग्रिड से जोड़ा जाएगा।
इससे पहले वैज्ञानिक रिएक्टर के व्यवहार का विस्तृत अध्ययन करेंगे।
भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम
भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तीन चरणों में विकसित किया गया है:
पहला चरण:
प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर (PHWR)
ईंधन: प्राकृतिक यूरेनियम
उप-उत्पाद: प्लूटोनियम
दूसरा चरण (PFBR):
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर
प्लूटोनियम का उपयोग और नए ईंधन का उत्पादन
तीसरा चरण:
थोरियम आधारित रिएक्टर
यूरेनियम-233 का उत्पादन और उपयोग
थोरियम क्यों है भारत के लिए अहम?
भारत के पास दुनिया के थोरियम भंडार का लगभग 25% हिस्सा है।
जबकि यूरेनियम का हिस्सा केवल 1–2% है।
थोरियम से भविष्य में सैकड़ों वर्षों तक ऊर्जा उत्पादन संभव है।
हालांकि, थोरियम सीधे उपयोगी नहीं होता—इसे पहले यूरेनियम-233 में बदलना पड़ता है, जो फास्ट ब्रीडर रिएक्टर जैसे PFBR में संभव है।
आगे की योजना और लक्ष्य
भारत का लक्ष्य परमाणु ऊर्जा से 100 GW बिजली उत्पादन का है।
7.30 GW क्षमता के नए रिएक्टर निर्माणाधीन हैं।
PFBR के सफल संचालन के बाद और फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बनाने की योजना है।
PFBR की ‘क्रिटिकैलिटी’ सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की दशकों पुरानी परमाणु ऊर्जा रणनीति की बड़ी सफलता है।
यह कदम देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जाएगा और भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा क्रांति का मार्ग प्रशस्त करेगा।