राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दो गुटों ने मंगलवार को अपना 26वां स्थापना दिवस मनाया। शरद पवार और अजीत पवार के नेतृत्व में दोनों खेमों ने पुणे में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए। हालाँकि, दोनों गुटों के विलय की अटकलें लंबे समय से लगाई जा रही हैं, लेकिन स्थापना दिवस के अलग-अलग आयोजनों से यह स्पष्ट हो गया कि मतभेद अभी भी कायम हैं।
अजीत पवार का विचार: “सिर्फ नारे लगाने से काम नहीं चलेगा”
2023 में चाचा शरद पवार से अलग होकर एनडीए में शामिल हुए अजीत पवार ने अपने निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि केवल विपक्ष में बैठना और मोर्चे निकालना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य समावेशी राजनीति और जनसमस्याओं का समाधान है। उन्होंने इस बात को नकारा कि भाजपा से गठबंधन पार्टी की विचारधारा से समझौता है और उदाहरण के तौर पर ममता बनर्जी और चंद्रबाबू नायडू को भी एनडीए का हिस्सा बताया।
गठबंधन का निर्णय सामूहिक था: सुनील तटकरे
राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने दावा किया कि एनडीए में शामिल होने का फैसला अजीत पवार का अकेला नहीं बल्कि एक सामूहिक निर्णय था। उन्होंने कहा कि पार्टी ने छत्रपति शिवाजी महाराज, फुले, अंबेडकर और शाहू महाराज की विचारधारा से समझौता किए बिना यह कदम उठाया। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी की यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में जारी रहेगी।
विलय की संभावना पर अजीत पवार और सुप्रिया सुले चुप
अविभाजित राकांपा के स्थापना दिवस पर अजीत पवार ने पार्टी के पुन: एकजुट होने के सवाल पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के निर्णय शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिए जाते हैं।
वहीं, शरद पवार गुट की सुप्रिया सुले ने भी स्पष्ट उत्तर देने से परहेज करते हुए कहा कि पारिवारिक रिश्ते बने हुए हैं और विलय जैसे फैसले “कैमरे पर नहीं, बातचीत की मेज़ पर” होने चाहिए।
शरद पवार का दर्द: “हमने विभाजन की कभी कल्पना नहीं की थी”
शरद पवार ने पार्टी में हुए विभाजन को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी इसकी कल्पना नहीं की थी। उन्होंने पार्टी के प्रति वफादार कार्यकर्ताओं की सराहना की और कहा कि अगर पार्टी एकजुट रही तो सत्ता अपने आप आएगी। उन्होंने नगर निगम और स्थानीय निकाय चुनावों में युवाओं और महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात कही।
एक मंच पर दिखने के बावजूद दूरी कायम
हाल के महीनों में दोनों गुटों के नेताओं की मुलाकातों और मंच साझा करने के बावजूद, स्थापना दिवस पर दिखा अलगाव यह दर्शाता है कि दोनों गुटों का विलय अभी भी दूर की बात है। दोनों पक्षों के बयान यही संकेत दे रहे हैं कि एकता की संभावनाएं बनी तो हुई हैं लेकिन वह अभी “सही समय” और “सही परिस्थितियों” की प्रतीक्षा कर रही हैं।