79वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) की शुरुआत की। इस योजना का उद्देश्य निजी क्षेत्र में पहली बार नौकरी पाने वाले युवाओं को आर्थिक सहायता और रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
पहली नौकरी पर युवाओं को मिलेगा प्रोत्साहन
इस योजना के तहत निजी क्षेत्र में पहली नौकरी पाने वाले युवाओं को सरकार की ओर से सीधे 15,000 रुपये दिए जाएंगे। यह राशि दो किस्तों में दी जाएगी—
पहली किस्त: छह महीने की सेवा पूरी होने पर
दूसरी किस्त: 12 महीने की सेवा और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा करने पर
3.5 करोड़ रोजगार सृजन का लक्ष्य
लगभग 99,446 करोड़ रुपये के बजट वाली यह योजना अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य रखती है। इनमें से लगभग 1.92 करोड़ लाभार्थी पहली बार नौकरी पाने वाले होंगे। योजना का लाभ 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित नौकरियों पर लागू होगा।
योजना की संरचना – दो भागों में विभाजन
भाग ‘क’ – पहली बार नौकरी करने वालों के लिए
ईपीएफओ में पंजीकृत कर्मचारियों को अधिकतम 15,000 रुपये सहायता।
पात्रता: अधिकतम मासिक वेतन 1 लाख रुपये।
भाग ‘ख’ – नियोक्ताओं के लिए प्रोत्साहन
प्रति अतिरिक्त कर्मचारी (वेतन 1 लाख रुपये तक और कम से कम 6 माह की सेवा) के लिए प्रति माह 3,000 रुपये तक का प्रोत्साहन दो वर्षों तक।
विनिर्माण क्षेत्र के लिए यह लाभ तीसरे और चौथे वर्ष तक भी जारी रहेगा।
पात्रता:
50 से कम कर्मचारी वाले प्रतिष्ठान को कम से कम 2 अतिरिक्त कर्मचारी रखने होंगे।
50 या अधिक कर्मचारी वाले प्रतिष्ठान को कम से कम 5 अतिरिक्त कर्मचारी रखने होंगे।
‘विकसित भारत’ पहल से जुड़ा उद्देश्य
यह योजना समावेशी और सतत रोजगार अवसर पैदा करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसमें विशेष ध्यान विनिर्माण क्षेत्र पर है, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि और रोजगार दर दोनों को गति मिल सके।