कर्नाटक में नई कांग्रेस सरकार के गठन को लेकर दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पार्टी हाईकमान, निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और नामित मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार नए मंत्रिमंडल के गठन को अंतिम रूप देने के लिए लगातार बैठकों में जुटे हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन बैठकों में मंत्रियों के चयन, विभागों के बंटवारे और उपमुख्यमंत्री पद को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। डीके शिवकुमार 3 जून को शाम 4 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे से मिलेंगे सिद्धारमैया
कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ अहम बैठक में शामिल होंगे। बैठक से पहले दिल्ली के एक होटल से रवाना होते समय उनकी मुलाकात विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी हुई।
जब सिद्धारमैया से बैठक के एजेंडे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता।” हालांकि माना जा रहा है कि बैठक में मंत्रिमंडल गठन और सत्ता संतुलन पर विस्तार से चर्चा होगी।
कई मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी संभव
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नए नेतृत्व को जगह देने के लिए सिद्धारमैया सरकार के कई मौजूदा मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है।
हालांकि, सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने दावा किया है कि उन्हें कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का आश्वासन मिला है। इससे राजनीतिक चर्चाओं को और बल मिला है।
प्रियांक खरगे को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक प्रियांक खरगे ने भी दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की।
सूत्रों के मुताबिक, नए मंत्रिमंडल में प्रियांक खरगे को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
मंत्री पद के दावेदारों की दिल्ली में जुटान
राजधानी दिल्ली इन दिनों कर्नाटक कांग्रेस के नेताओं का केंद्र बनी हुई है। मंत्री पद की दौड़ में शामिल कई विधायक और वरिष्ठ नेता पार्टी नेतृत्व से मुलाकात कर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
कांग्रेस हाईकमान आज मंत्रियों की अंतिम सूची को मंजूरी दे सकता है। इसके लिए पार्टी क्षेत्रीय, जातीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए व्यापक मंथन कर रही है।
उपमुख्यमंत्री पद और संगठनात्मक ढांचे पर भी चर्चा
मंत्रिमंडल गठन के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री पदों की संख्या और संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर भी विचार-विमर्श जारी है। पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि सभी वर्गों और क्षेत्रों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले।
दो चरणों में हो सकता है मंत्रिमंडल विस्तार
पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों और विधायकों के अनुसार, आंतरिक असंतोष और प्रतिस्पर्धा को संतुलित करने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार दो चरणों में किया जा सकता है।
ऐसा माना जा रहा है कि पहले चरण में प्रमुख चेहरों को शामिल किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में बाकी दावेदारों को अवसर दिया जा सकता है। अब सभी की निगाहें कांग्रेस हाईकमान की अंतिम बैठक और मंत्रिमंडल की घोषित सूची पर टिकी हैं