दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। इंडिया टुडे की ज़मीनी पड़ताल में कई वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में लापरवाही सामने आई है, जैसे डिस्प्ले बोर्ड की खराबी, सेंसर की संदिग्ध स्थिति और ज़मीनी रीडिंग और आधिकारिक आंकड़ों में बड़े अंतर।
मुख्य बिंदु:
CPCB का दावा: दिल्ली के सभी 39 वायु निगरानी केंद्र काम कर रहे हैं।
ज़मीनी हकीकत: कई डिस्प्ले बोर्ड बंद, छिपे या हरियाली के बीच लगे हैं, जिससे जनता को लाइव डेटा नहीं मिल पा रहा।
बाहरी दिल्ली के नरेला में आईटीआई परिसर का बोर्ड काम नहीं कर रहा, जबकि वहीं एंटी-स्मॉग गन सक्रिय मिली।
AQI आंकड़े:
‘बेहद खराब’ श्रेणी में: अशोक विहार (322), बवाना (348), जहांगीरपुरी (350), विवेक विहार (346)।
‘गंभीर’ श्रेणी: आनंद विहार (403)।
‘मध्यम’ श्रेणी में सुधार: लोधी रोड (198), फरीदाबाद (198)।
दिल्ली के आसपास नोएडा (264), ग्रेटर नोएडा (272), गाजियाबाद (273), गुरुग्राम (208)।
विशेष जानकारी:
CPCB के अनुसार, AQI 0–50 अच्छा, 51–100 संतोषजनक, 101–200 मध्यम, 201–300 खराब, 301–400 बेहद खराब, 401–500 गंभीर माना जाता है।
दिल्ली सरकार पहली क्लाउड सीडिंग 29 अक्टूबर को करने की योजना बना रही है, ताकि हवा को स्वच्छ और पर्यावरण संतुलित किया जा सके।
CPCB के दावों और वास्तविक परिस्थितियों में बड़ा अंतर है। शहर में वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग प्रणाली की कार्यप्रणाली और सही आंकड़ों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।