सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे मुद्दे, ट्रायल से पहले लंबी हिरासत के दावों से अधिक महत्वपूर्ण हैं।
पांच अन्य आरोपियों को मिली जमानत
हालांकि, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने इसी मामले में नामजद पांच अन्य आरोपियों—
गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद—को जमानत दे दी।
हाई कोर्ट के आदेश को दी गई थी चुनौती
आरोपियों ने दिल्ली हाई कोर्ट के 2 सितंबर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें साजिश के मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
अदालत में किसने रखी दलीलें
दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू पेश हुए।
वहीं, आरोपियों की ओर से कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा समेत कई वरिष्ठ वकीलों ने पक्ष रखा।
दिल्ली पुलिस ने जमानत का किया विरोध
जमानत का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने दलील दी कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा अचानक नहीं, बल्कि भारत की संप्रभुता को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई पहले से सोची-समझी और सुनियोजित साजिश का परिणाम थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सभी आरोपी एक साझा योजना (कॉमन प्लान) का हिस्सा थे और एक-दूसरे के कृत्यों के लिए जिम्मेदार हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
पीठ ने कहा,
“अभियोजन पक्ष की सामग्री से उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप बनते हैं। इस स्तर पर उन्हें जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है।”
उमर-शरजील की भूमिका बताई गई ‘केंद्रीय’
कोर्ट ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम की स्थिति अन्य आरोपियों से गुणात्मक रूप से अलग है और कथित अपराधों में उनकी भूमिका केंद्रीय बताई गई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जेल में रहने की लंबी अवधि संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करती और न ही वैधानिक प्रतिबंध को खत्म करती है।
भविष्य में जमानत के लिए दी गई छूट
सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए उन्हें यह स्वतंत्रता दी कि वे
सभी अभियोजन गवाहों की जांच पूरी होने के बाद, या
किसी भी स्थिति में एक साल बाद,
ट्रायल कोर्ट में फिर से जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
दिल्ली दंगे मामला: क्या हैं आरोप?
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पर फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों का “मास्टरमाइंड” होने का आरोप है।
उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है।
दंगों में 53 की मौत, 700 से ज्यादा घायल
फरवरी 2020 में हुए इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। यह हिंसा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।