दिल्ली और एनसीआर में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। लोगों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने GRAP-III लागू करते हुए कई सख्त कदम उठाए हैं।
दिल्ली के आनंद विहार में AQI 441, बवाना में 455, द्वारका सेक्टर 8 में 444 और जहांगीरपुरी में 458 दर्ज किया गया।
दिल्ली-एनसीआर के 27 से अधिक निगरानी स्टेशनों ने ‘गंभीर’ श्रेणी में वायु गुणवत्ता रिपोर्ट की।
प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहन से निकलने वाला धुआं, जो कुल प्रदूषण का 12.2% है, और पराली जलाना रहा।
वाहन प्रतिबंध : BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल वाहनों पर रोक; उल्लंघन पर ₹20,000 जुर्माना।
निर्माण गतिविधियां : प्रदूषणकारी निर्माण और खनन पर सख्ती; केवल कम-प्रदूषणकारी निर्माण की अनुमति।
सार्वजनिक परिवहन : डीएमआरसी ने 20 अतिरिक्त मेट्रो फेरे शुरू किए।
स्कूल व्यवस्था : प्राथमिक स्कूलों में फिजिकल क्लास बंद, ऑनलाइन क्लास जारी।
बीजेपी का हमला : दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय से इस्तीफे की मांग।
गोपाल राय का पलटवार : पड़ोसी राज्यों की भाजपा सरकारों पर पराली जलाने को रोकने में विफल रहने का आरोप।
पंजाब में 5, हरियाणा में 11 और उत्तर प्रदेश में 202 खेतों में आग लगने की घटनाएं दर्ज।
पराली जलाना दिल्ली के वायु प्रदूषण का प्रमुख स्रोत।
पानी का छिड़काव: प्रमुख सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव।
इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल : NCR में इलेक्ट्रिक और CNG वाहन चलाने को बढ़ावा।
जनजागरूकता अभियान: लोगों को प्रदूषण कम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गई है। प्रदूषण के खतरनाक स्तर से निपटने के लिए सरकार ने कई सख्त कदम उठाए हैं। जनता से अपील है कि वे पर्यावरण के प्रति जागरूक बनें और प्रदूषण कम करने में योगदान दें।