पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ के खिलाफ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने सभी 23 जिलों में विशेष होल्डिंग सेंटर बनाने के निर्देश जारी किए हैं, जहां अवैध बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अन्य विदेशी नागरिकों को निर्वासन तक रखा जाएगा।
सरकार की “पहचान करो, सूची से हटाओ और देश से बाहर भेजो” नीति के तहत अब अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गृह विभाग ने जिलाधिकारियों को जारी किए निर्देश
राज्य के गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा है कि अवैध विदेशी नागरिकों और जेल से रिहा हुए विदेशी कैदियों के लिए जिला स्तर पर विशेष होल्डिंग सेंटर बनाए जाएं।
यह कदम केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की उस गाइडलाइन के तहत उठाया गया है, जिसमें राज्यों को अवैध विदेशियों की पहचान, सत्यापन और निर्वासन की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए थे।
‘पहचान करो और बाहर भेजो’ नीति पर सरकार
मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने हाल ही में कहा था कि उनकी सरकार अवैध घुसपैठियों के खिलाफ “पहचान करो, सूची से हटाओ और देश से बाहर भेजो” नीति पर काम करेगी।
सरकार का कहना है कि जो लोग नागरिकता कानून के दायरे में नहीं आते और बिना वैध दस्तावेज के राज्य में रह रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
30 दिन तक रखा जा सकेगा हिरासत में
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, इन होल्डिंग सेंटरों में संदिग्ध विदेशी नागरिकों को अधिकतम 30 दिनों तक रखा जा सकेगा।
इस दौरान उनकी पहचान, दस्तावेज और नागरिकता की जांच की जाएगी। अंतिम फैसला जिलाधिकारी या संबंधित सक्षम अधिकारी के स्तर पर लिया जाएगा।
केंद्र सरकार ने पहले भी दिए थे निर्देश
पिछले वर्ष केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बांग्लादेश और म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों, खासकर रोहिंग्या समुदाय की पहचान और सत्यापन के निर्देश दिए थे।
इसके तहत बायोमेट्रिक डेटा दर्ज करने और जिला स्तर पर होल्डिंग सेंटर बनाने को कहा गया था ताकि निर्वासन प्रक्रिया तेज की जा सके।
पहले विरोध में थी राज्य सरकार
पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी पार्टी ने पहले इस व्यवस्था का विरोध किया था।
तृणमूल कांग्रेस का आरोप था कि यह राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विस्तार है और इससे भारतीय नागरिकों की नागरिकता पर सवाल उठ सकते हैं।
ममता बनर्जी ने कई बार कहा था कि उनकी सरकार किसी को भी डिटेंशन सेंटर नहीं भेजेगी।
सीमा सुरक्षा और घुसपैठ बड़ा मुद्दा
भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ को बड़ा राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दा बताती रही है।
राज्य की बांग्लादेश से लगभग 2216 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा अब भी बिना बाड़ के है। हाल ही में राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा बल को कुछ इलाकों में बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराई है।
विदेशी नागरिकों से जुड़े आंकड़े
रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में विदेशी नागरिक अधिनियम और विदेशी पंजीकरण अधिनियम के तहत बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में रखा गया था।
जेलों में बंद विदेशी नागरिकों में सबसे अधिक संख्या बांग्लादेशी नागरिकों की बताई गई है।
सरकार बोली- कानून से ऊपर कोई नहीं
राज्य सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें वापस भेजना है।
सरकार का दावा है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।