कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 की संवैधानिक वैधता को जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह विधेयक भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों पर हमला है और कांग्रेस इसका विरोध जारी रखेगी।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“कांग्रेस द्वारा सीएए, 2019, आरटीआई अधिनियम में संशोधन और चुनाव संचालन नियमों (2024) की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहले से सुनवाई चल रही है। अब वक्फ (संशोधन) विधेयक को भी हम शीर्ष अदालत में चुनौती देंगे।”
कांग्रेस का आरोप: संविधान पर मोदी सरकार का हमला
जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस संविधान के सिद्धांतों, प्रावधानों और संवैधानिक परंपराओं पर मोदी सरकार के हर हमले का विरोध करती रहेगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि पार्टी मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
संसद से पारित हुआ वक्फ संशोधन विधेयक, विपक्ष का तीखा विरोध
राज्यसभा और लोकसभा दोनों में पारित
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को शुक्रवार सुबह संसद से मंजूरी मिली। इससे पहले 13 घंटे लंबी बहस के बाद राज्यसभा ने इसे पारित किया था। विधेयक के पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 वोट पड़े। लोकसभा में इसे पहले ही पारित किया जा चुका था, जहाँ 288 सांसदों ने समर्थन और 232 ने विरोध किया था।
विपक्ष की आपत्ति: मुस्लिम विरोधी और असंवैधानिक
विपक्षी दलों ने इस विधेयक को “मुस्लिम विरोधी” और “असंवैधानिक” करार दिया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह विधेयक मुसलमानों की संपत्तियों पर सरकार के कब्जे का रास्ता तैयार करता है और उन्हें निजी कंपनियों को सौंपने की साजिश है।
मुस्लिम वक्फ (निरसन) विधेयक को भी मिली संसद से मंजूरी
सरकार का पक्ष: ऐतिहासिक सुधार
सरकार ने इन विधेयकों को “ऐतिहासिक सुधार” बताया और कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गरीब व पसमांदा मुसलमानों को लाभ मिलेगा। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने संसद में कहा कि वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के लिए यह बदलाव जरूरी हैं।