केंद्र सरकार ने गुरुवार को सोनम वांगचुक के गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का एफसीआरए लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। यह फैसला लद्दाख में हुई हिंसा के बाद लिया गया है, जिसमें चार लोगों की मौत और कई लोग घायल हुए।
एफसीआरए नियमों का उल्लंघन
गृह मंत्रालय (एमएचए) ने आदेश में कहा कि एनजीओ ने विदेशी चंदा नियमों का बार-बार उल्लंघन किया।
वांगचुक के व्यक्तिगत और संयुक्त खातों में विदेशी धन प्राप्त हुआ, जो एफसीआरए 2010 का सीधा उल्लंघन है।
2021 से 2024 के बीच एनजीओ को विदेशों से करोड़ों रुपये मिले।
यह धन अज्ञात संस्थाओं को भेजा गया, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका बढ़ी।
वित्तीय कदाचार और निजी लाभ का आरोप
गृह मंत्रालय ने कहा कि सोनम वांगचुक खुद को जनता का प्रतिनिधि बताते हैं, लेकिन उनका रिकॉर्ड वित्तीय कदाचार को दर्शाता है।
उनके कार्यों से रचनात्मक संवाद पटरी से उतरने का खतरा है।
मंत्रालय के अनुसार, 59 वर्षीय वांगचुक के नौ निजी बैंक खाते हैं, जिनमें से आठ घोषित नहीं किए गए।
इन खातों में भारी मात्रा में विदेशी धन जमा है।
2021 से 2024 के बीच वांगचुक ने अपने निजी खाते से करीब 2.3 करोड़ रुपये विदेश भेजे।
विदेशी धन और कॉर्पोरेट संबंध
गृह मंत्रालय ने यह भी बताया कि:
2018 से 2024 के बीच वांगचुक ने विभिन्न खातों में 1.68 करोड़ रुपये का विदेशी धन प्राप्त किया।
वह कॉर्पोरेट क्षेत्र की आलोचना करते हैं, लेकिन केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों सहित कई कॉर्पोरेट संस्थाओं से सीएसआर (CSR) के तहत भारी धनराशि ली।
लद्दाख हिंसा और प्रदर्शन
लद्दाख में हुई हिंसा में चार लोगों की मौत और 40 पुलिसकर्मियों समेत 80 लोग घायल हुए।
प्रदर्शनकारी लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के विस्तार की मांग कर रहे हैं।
छठी अनुसूची के तहत आदिवासी आबादी को शासन, राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों, स्थानीय निकायों, वैकल्पिक न्यायिक तंत्र और स्वायत्त परिषदों के माध्यम से विशेष वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार दिए जाते हैं।