राजस्थान पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित एक बड़े साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। यह गिरोह कंबोडिया से ऑपरेट किया जा रहा था और निवेश व ट्रेडिंग के नाम पर देशभर के लोगों से ठगी कर रहा था।
1100 करोड़ रुपये की साइबर ठगी
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने करीब 1,100 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया। इस ठगी का शिकार 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के हजारों लोग बने हैं।
कैसे काम करता था साइबर रैकेट?
पुलिस के अनुसार, भारत में मौजूद गिरोह के सदस्य बड़ी संख्या में सिम कार्ड खरीदते थे।
इन सिम कार्ड्स को कंबोडिया भेज दिया जाता था, जहां बैठे चार मलेशियाई नागरिक इनका इस्तेमाल फर्जी निवेश और ट्रेडिंग योजनाएं चलाने में करते थे।
लोगों को ज्यादा मुनाफे का लालच देकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ठगा जाता था।
5300 सिम कार्ड से की गई ठगी
जोधपुर पुलिस आयुक्त ओम प्रकाश ने बताया कि अब तक की जांच में सामने आया है कि करीब 5,300 सिम कार्ड का इस्तेमाल इस साइबर ठगी में किया गया।
पुलिस ने अन्य राज्यों के साथ समन्वय कर सभी सिम कार्ड को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अब तक 6 आरोपी गिरफ्तार
राजस्थान पुलिस ने इस मामले में अब तक 6 भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:
प्रकाश भील
मोहम्मद शरीफ
हरीश मलाकर
रामावतार
हेमंत पंवार
संदीप भट्ट
वांछित आरोपी
पुलिस के अनुसार, राहुल झा समेत गिरोह के तीन अन्य सदस्य फरार हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का खुलासा
जांच में इस साइबर रैकेट के अंतरराष्ट्रीय लिंक भी सामने आए हैं। इसमें शामिल चार मलेशियाई नागरिकों की पहचान इस प्रकार की गई है:
ली जियान हुई
यू मिंग चिन
लो दी खेन
लियोन केन नेथ
लुकआउट सर्कुलर जारी
पुलिस ने इन चारों मलेशियाई नागरिकों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया है, ताकि उन्हें देश छोड़ने से रोका जा सके और जल्द गिरफ्तार किया जा सके।