भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम को तय करने के करीब है। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और पार्टी नेताओं के बीच गहन विचार-विमर्श चल रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा यह घोषणा 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद और बिहार विधानसभा चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से पहले कर सकती है।
वरिष्ठ नेताओं से व्यापक परामर्श
भाजपा और आरएसएस ने लगभग 100 प्रमुख हस्तियों से नए अध्यक्ष पद के लिए सुझाव मांगे हैं।
परामर्श में पूर्व भाजपा अध्यक्ष, वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और आरएसएस से जुड़े नेता शामिल हैं, जो संवैधानिक पदों पर रह चुके हैं।
पार्टी अपने वरिष्ठ मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों से भी राय ले रही है।
विचार किए जा रहे कारक
जातिगत समीकरण, लोकप्रियता और राजनीतिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखा जा रहा है।
उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार चयन की तरह ही प्रतिक्रिया प्रक्रिया अपनाई गई है।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने विशेष रूप से 86 प्रमुख नेताओं से विस्तृत बातचीत की है।
इनमें से कई वर्तमान कैबिनेट मंत्री भी शामिल हैं।
देरी के पीछे कारण
प्रक्रिया में देरी का मुख्य कारण कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा जैसे बड़े राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा में हुई देरी है।
अभी तक दिल्ली, मुंबई, पंजाब और मणिपुर में भी नए अध्यक्षों की नियुक्ति बाकी है।
भाजपा संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव से पहले 36 में से कम से कम 19 राज्यों में प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा आवश्यक है।
भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा, यह सवाल अभी अनुत्तरित है। लेकिन लगातार हो रहे परामर्श और वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी से साफ है कि उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद पार्टी बड़े स्तर पर संगठनात्मक बदलावों की घोषणा कर सकती है।