बर्मिंघम टेस्ट में भारतीय तेज गेंदबाज आकाश दीप ने इंग्लैंड के खिलाफ यादगार प्रदर्शन करते हुए 10 विकेट झटके और भारत को 336 रनों से ऐतिहासिक जीत दिलाई। आकाश ने यह प्रदर्शन अपनी बड़ी बहन को समर्पित किया, जो पिछले दो महीनों से कैंसर से लड़ रही हैं। मैच के बाद एक भावुक बातचीत में आकाश ने कहा,
“जब भी गेंद हाथ में आती थी, मैं अपनी बहन के संघर्ष को याद करता था।”
आकाश ने बताया कि वे उसके चेहरे पर मुस्कान लाना चाहते थे और यही उनके प्रदर्शन की सबसे बड़ी प्रेरणा थी।
संघर्षों से बना सितारा
आज जिस आकाश दीप को पूरा देश सलाम कर रहा है, उनका सफर संघर्षों से भरा रहा है। 22 साल की उम्र में उन्होंने क्रिकेट से ब्रेक ले लिया था ताकि अपने लकवाग्रस्त पिता की सेवा कर सकें। लेकिन कुछ ही समय बाद पिता और फिर बड़े भाई का निधन हो गया। परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गईं।
तीन साल तक क्रिकेट से दूरी और परिवार का त्याग— यह वो दौर था जिसने आकाश को भीतर से मजबूत बनाया। 2016 में उन्होंने सासाराम (बिहार) से पश्चिम बंगाल का रुख किया। दुर्गापुर में टेनिस बॉल क्रिकेट से शुरुआत की और फिर बंगाल रणजी टीम तक का सफर तय किया।
गुमनामी से ग्लोरी तक
आकाश का करियर गुमनामी से शुरू हुआ, लेकिन उन्होंने कड़ी मेहनत से खुद को बंगाल क्रिकेट में स्थापित किया और अब टीम इंडिया के स्टार बन चुके हैं। बर्मिंघम टेस्ट की दूसरी पारी में 6 विकेट लेकर वे इंग्लैंड में टेस्ट में 10 विकेट लेने वाले चेतन शर्मा के बाद दूसरे भारतीय गेंदबाज बन गए।
“बहन, हम सब तुम्हारे साथ हैं”
मैच के बाद उन्होंने चेतेश्वर पुजारा से बात करते हुए कहा,
“हर बार जब गेंद लेता, मेरी बहन की छवि सामने आ जाती थी। मैं उसे बताना चाहता हूं, ‘हम सब तुम्हारे साथ हैं।’”
लॉर्ड्स पर नहीं, अभी वर्तमान का आनंद
आकाश ने कहा कि वह लॉर्ड्स में होने वाले अगले टेस्ट के बारे में अभी नहीं सोच रहे हैं।
“मैं सिर्फ इस पल का आनंद लेना चाहता हूं। जो योजना यहां सफल रही, वह आगे भी काम कर सकती है। जरूरी है अपने प्रोसेस पर भरोसा रखना।”