सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को जारी रखने की अनुमति दे दी है। इस निर्णय के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग को SIR जारी रखने की छूट दी और इसे “संवैधानिक दायित्व” करार दिया।
चुनाव आयोग के फैसले पर अदालत की टिप्पणी
हालांकि, पीठ ने चुनाव से कुछ महीने पहले SIR प्रक्रिया शुरू करने पर निर्वाचन आयोग के फैसले पर सवाल भी उठाया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यह कदम लोकतंत्र और वोट देने की शक्ति की जड़ पर हमला करता है।”
कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया, “हम आपको रोक नहीं रहे हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि आप कानून के दायरे में कार्य करें।” अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख तय की है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
इस फैसले के बाद बिहार में विपक्ष और सत्ताधारी दलों के बीच बयानबाज़ी तेज हो गई है। SIR को लेकर जहां एक ओर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं सरकार इसे मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने का प्रयास बता रही है।