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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 833 अंक लुढ़का

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने रविवार को खतरनाक मोड़ ले लिया, जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बरकाह परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमला हुआ। इस घटना के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों और कमोडिटी मार्केट में भारी हलचल देखने को मिली, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 833 अंक टूटा

भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने का असर सोमवार सुबह भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 833.20 अंक टूटकर 74,404.79 पर पहुंच गया।

वहीं एनएसई निफ्टी 234 अंक फिसलकर 23,401.70 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।

इन दिग्गज शेयरों में आई बड़ी गिरावट

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से टाटा स्टील, पावर ग्रिड, मारुति, ट्रेंट, टाइटन और एचडीएफसी बैंक के शेयर सबसे ज्यादा नुकसान में रहे।

हालांकि आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली। इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर बढ़त में कारोबार करते दिखे।

एशियाई बाजारों में भी दबाव

वैश्विक तनाव का असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा। जापान का निक्की 225, चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट में रहे।

हालांकि दक्षिण कोरिया का कॉस्पी इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया।

अमेरिकी बाजार भी रहे दबाव में

अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को एक प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए थे। निवेशकों की चिंता का बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और ऊर्जा संकट की आशंका रही।

कच्चा तेल 111 डॉलर के पार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 1.79 प्रतिशत बढ़कर 111.2 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर भारत जैसे आयातक देशों पर ज्यादा पड़ेगा।

FIIs की खरीदारी भी नहीं संभाल पाई बाजार

दिलचस्प बात यह रही कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार दूसरे दिन भारतीय बाजार में शुद्ध खरीदार रहे। शुक्रवार को उन्होंने 1,329.17 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।

इसके बावजूद, सप्ताहांत में हुए ड्रोन हमले और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली।

आगे भी जारी रह सकती है बाजार में उठापटक

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

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