भारतीय सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों के बैंड समूहों ने बीटिंग रिट्रीट समारोह में देशभक्ति से ओतप्रोत मधुर धुनों की प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीत लिया। इस दौरान ‘वंदे मातरम्’, ‘कदम कदम बढ़ाए जा’, ‘विजय भारत’, ‘सितारे हिंद’ और ‘ब्रेव वारियर’ जैसे प्रेरणादायक गीतों की गूंज कर्तव्य पथ पर सुनाई दी।
गणतंत्र दिवस समारोह का गरिमामय समापन
बीटिंग रिट्रीट परंपरागत रूप से हर वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के समापन का प्रतीक माना जाता है। 26 जनवरी को सैन्य शक्ति और शौर्य के प्रदर्शन के बाद यह आयोजन शांति, अनुशासन और गरिमा का संदेश देता है।
भारतीय वाद्ययंत्रों के नाम पर दर्शक दीर्घाएं
इस वर्ष बीटिंग रिट्रीट समारोह को खास बनाने के लिए दर्शकों के बैठने के स्थानों के नाम भारतीय वाद्ययंत्रों के नाम पर रखे गए। इनमें बांसुरी, डमरू, एकतारा, एसराज, मृदंगम, नगाड़ा, पखावज, संतूर, सारंगी, सरिंदा, सरोद, शहनाई, सितार, सुरबहार, तबला और वीणा शामिल रहे।
‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ बना मुख्य विषय
इस वर्ष कर्तव्य पथ पर आयोजित औपचारिक परेड और उससे जुड़े सभी समारोहों का केंद्रीय विषय राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ रहा। इस प्रकार, गणतंत्र दिवस 2026 का यह आयोजन राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने के उत्सव के रूप में भी मनाया गया।
राष्ट्रपति सहित विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
सेना, नौसेना, वायु सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंडों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों के समक्ष शानदार प्रस्तुतियां दीं।
संगीतमय शुरुआत और बैंड्स की आकर्षक धुनें
समारोह की शुरुआत सामूहिक बैंड द्वारा ‘कदम कदम बढ़ाए जा’ की धुन से हुई। इसके बाद पाइप और ड्रम बैंड ने ‘अतुल्य भारत’, ‘वीर सैनिक’, ‘मिली झूली’, ‘नृत्य सरिता’, ‘मरूनी’ और ‘झेलम’ जैसी मनभावन धुनें प्रस्तुत कीं।
तीनों सेनाओं और CAPF बैंड्स का अद्भुत संगम
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंड्स ने ‘विजय भारत’, ‘हथरोही’, ‘जय हो’ और ‘वीर सिपाही’ की धुनें बजाईं।
वायु सेना बैंड की प्रस्तुतियों में ‘ब्रेव वॉरियर’, ‘ट्वाइलाइट’, ‘अलर्ट’ और ‘फ्लाइंग स्टार’ शामिल रहीं।
नौसेना बैंड ने ‘नमस्ते’, ‘सागर पवन’, ‘मातृभूमि’, ‘तेजस्वी’ और ‘जय भारती’ की धुनों से समां बांधा।
थल सेना बैंड ने ‘विजयी भारत’, ‘आरंभ है प्रचंड है’, ‘ऐ वतन ऐ वतन’, ‘आनंद मठ’, ‘सुगम्य भारत’ और ‘सितारे हिंद’ प्रस्तुत किए।
बीटिंग रिट्रीट: परंपरा और इतिहास
बीटिंग रिट्रीट हर वर्ष 29 जनवरी की शाम को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होता है। इसका मूल विचार 17वीं सदी के इंग्लैंड से आया था, जब सूर्यास्त के समय सैनिकों को वापस बुलाने के लिए नगाड़ा या ड्रम बजाया जाता था। भारत में इसकी शुरुआत स्वतंत्रता के बाद 1950 के दशक में हुई और तब से यह भारतीय सशस्त्र बलों की परंपरा का अभिन्न हिस्सा बन गया है।
अनुशासन और संगीत का विराट संगम
सूर्यास्त के साथ कर्तव्य पथ पर अनुशासन, संगीत और राष्ट्रगौरव का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। राष्ट्रपति के आगमन के साथ वातावरण में गंभीरता और गर्व की लहर दौड़ गई। बीटिंग रिट्रीट यह संदेश देता है कि भारत शांति प्रिय है, लेकिन अपनी रक्षा के लिए सदैव सजग और सक्षम भी है।