बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में नामांकन से जुड़े विवादों के बाद अब भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा की शैक्षणिक योग्यता को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल ने उनके चुनावी हलफनामे में दर्ज शैक्षणिक जानकारी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इसमें शिक्षा का पूरा विवरण नहीं दिया गया है।
हालांकि, निर्वाचन अधिकारी नीरज कुमार सिन्हा के नामांकन पत्र की जांच कर उसे पहले ही वैध घोषित कर चुके हैं। ऐसे में फिलहाल उनके चुनाव लड़ने पर किसी प्रकार की प्रशासनिक रोक नहीं है।
क्या है राजद का आरोप?
राजद विधायक रणविजय साहू ने दावा किया है कि भाजपा प्रत्याशी के हलफनामे में मैट्रिक और स्नातक की शिक्षा का उल्लेख है, लेकिन इंटरमीडिएट की जानकारी दर्ज नहीं की गई है।
राजद का तर्क है कि यदि कोई उम्मीदवार स्नातक की डिग्री प्राप्त करने की जानकारी देता है तो उससे पहले की शैक्षणिक योग्यता का विवरण भी सार्वजनिक दस्तावेज में स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए।
पार्टी ने इस मामले की जांच कराने की मांग की है। राजद नेताओं का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इसे कानूनी मंच पर भी उठाया जा सकता है। हालांकि, अभी तक राजद की ओर से डिग्री को फर्जी साबित करने वाला कोई दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है। विवाद मुख्य रूप से हलफनामे में इंटरमीडिएट का विवरण नहीं होने को लेकर है।
नामांकन पहले ही हो चुका है स्वीकार
निर्वाचन प्रक्रिया के तहत सभी उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच पूरी हो चुकी है। रिटर्निंग अधिकारी ने नीरज कुमार सिन्हा का नामांकन वैध पाया है।
इसका अर्थ है कि हलफनामे में इंटरमीडिएट की जानकारी नहीं होने के बावजूद निर्वाचन अधिकारी ने अभी ऐसी कोई कमी नहीं पाई, जिसके आधार पर नामांकन रद्द किया जाए। इसलिए नीरज सिन्हा भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में बने हुए हैं।
भाजपा ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
भाजपा ने राजद के आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें चुनावी राजनीति से प्रेरित बताया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि उम्मीदवार के नामांकन पत्र और हलफनामे की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच की गई है।
उन्होंने कहा कि जांच के बाद नामांकन स्वीकार हो चुका है, इसलिए राजद के आरोपों का कोई ठोस तथ्यात्मक आधार नहीं है। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष चुनाव के दौरान मतदाताओं के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है।
कहां से की मैट्रिक और स्नातक की पढ़ाई?
चुनावी हलफनामे में दी गई जानकारी के अनुसार नीरज कुमार सिन्हा ने वर्ष 2012 में हाई स्कूल गोना से बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अंतर्गत मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
इसके बाद उन्होंने वर्ष 2024 में मगध महाविद्यालय, सकुराबाद, जहानाबाद से स्नातक की डिग्री प्राप्त करने की जानकारी दी है। हलफनामे में इंटरमीडिएट की शिक्षा से संबंधित संस्थान, बोर्ड या उत्तीर्ण होने के वर्ष का उल्लेख नहीं होने को ही राजद ने मुद्दा बनाया है।
आपराधिक मामला नहीं होने की घोषणा
नीरज कुमार सिन्हा ने अपने चुनावी शपथ पत्र में घोषित किया है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
यह जानकारी उम्मीदवार द्वारा निर्वाचन आयोग के समक्ष दिए गए हलफनामे पर आधारित है। चुनावी हलफनामे में उम्मीदवार को अपनी शिक्षा, संपत्ति, देनदारियों और आपराधिक मामलों सहित निर्धारित विवरण सार्वजनिक करना होता है।
कितनी संपत्ति के मालिक हैं नीरज सिन्हा?
हलफनामे में भाजपा प्रत्याशी ने अपने नाम लगभग 12.28 लाख रुपये की चल संपत्ति और आठ लाख रुपये की अचल संपत्ति घोषित की है। इस प्रकार उनकी कुल घोषित संपत्ति करीब 20.28 लाख रुपये बताई गई है।
उनके पास 70 हजार रुपये नकद होने की जानकारी दी गई है। बैंक जमा में भारतीय स्टेट बैंक की मीठापुर शाखा में लगभग 8.99 लाख रुपये और यूको बैंक में 25 हजार रुपये शामिल हैं।
आभूषणों में करीब 1.32 लाख रुपये मूल्य की सोने की चेन, चार ग्राम की सोने की अंगूठी और 200 ग्राम चांदी घोषित की गई है। अचल संपत्ति के रूप में उनके नाम 10 डिसमिल कृषि भूमि दर्ज है।
कोई बैंक कर्ज नहीं
हलफनामे के मुताबिक नीरज कुमार सिन्हा पर किसी बैंक या वित्तीय संस्थान का कर्ज नहीं है। उन्होंने अलग-अलग वित्तीय वर्षों की आय का विवरण भी दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 और 2022-23 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल नहीं होने की जानकारी दी गई है। ये सभी आंकड़े उम्मीदवार द्वारा चुनावी हलफनामे में की गई घोषणाओं पर आधारित हैं।
चुनाव में नया सियासी मुद्दा
बांकीपुर उपचुनाव में इससे पहले भाजपा ने जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर की शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल उठाए थे। अब राजद ने भाजपा प्रत्याशी के हलफनामे को मुद्दा बनाकर राजनीतिक मुकाबले को और तीखा कर दिया है।
फिलहाल नीरज सिन्हा का नामांकन वैध है और चुनावी प्रक्रिया जारी है। राजद आगे अदालत या निर्वाचन अधिकारियों के सामने कोई औपचारिक शिकायत देता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी। अभी यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर है और किसी सक्षम प्राधिकारी ने उनकी स्नातक डिग्री को अवैध या फर्जी घोषित नहीं किया है।