वृन्दावन स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर को अब केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के तहत लाइसेंस प्रदान किया गया है। इसके बाद अब मंदिर को विदेशों से दान प्राप्त करने का अधिकार मिल गया है।
मंदिर का प्रबंधन और एफसीआरए लाइसेंस का आवेदन
बांके बिहारी मंदिर का प्रबंधन फिलहाल एक अदालत द्वारा नियुक्त प्रबंधन समिति द्वारा किया जा रहा है। यह समिति एफसीआरए लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदन करने वाली थी, जिसे अब गृह मंत्रालय द्वारा मंजूरी मिल गई है। इससे पहले मंदिर का प्रबंधन एक पुजारी परिवार द्वारा किया जाता था और यह निजी प्रबंधन के अधीन था।
विदेशी दान स्वीकार करने का उद्देश्य
एफसीआरए लाइसेंस के तहत मंदिर को विदेशी दान स्वीकार करने का अधिकार मिला है। मंदिर ने अब तक कई विदेशी मुद्राएं प्राप्त की हैं, और अब उसका उद्देश्य विदेशों से भी दान स्वीकार करना है। FCRA के अनुसार, जो संगठन विदेशी दान प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें इस अधिनियम के तहत पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
मंदिर को मिल रही तीन प्रकार की फंडिंग
मंदिर के पुजारियों में से एक, अशोक गोस्वामी ने बताया कि मंदिर को तीन प्रकार की फंडिंग प्राप्त हो रही है। पहला, भक्त सीधे पुजारियों को दान देते हैं; दूसरा, दान चेक या डिजिटल भुगतान के माध्यम से होता है; और तीसरा, मंदिर की दान पेटियों में दान दिया जाता है।
बांके बिहारी मंदिर को मिला यह FCRA लाइसेंस न केवल विदेशी भक्तों से दान प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल करेगा, बल्कि मंदिर के संचालन में भी नई दिशा देगा।