असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोराह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
बताया जा रहा है कि बोराह ने अपने इस फैसले के लिए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की कार्यशैली और कथित मनमानी को जिम्मेदार ठहराया है।
यह घटनाक्रम प्रियंका गांधी के प्रस्तावित असम दौरे से कुछ दिन पहले सामने आया है।
हाईकमान को भेजा इस्तीफा
सूत्रों के मुताबिक, बोराह ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजा है।
उन्होंने पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को भी पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
अपने पत्र में बोराह ने कहा कि राज्य इकाई में उनकी लगातार उपेक्षा की जा रही थी और उन्हें उनका उचित स्थान नहीं दिया जा रहा था।
उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को स्थिति से अवगत कराने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला, जिससे उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंची।
हिमंत बिस्वा सरमा का तंज
इस्तीफे की खबर फैलते ही असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
सरमा ने बोराह को “असम कांग्रेस का आखिरी हिंदू नेता” बताते हुए कहा कि वे उनसे मिलने उनके घर जाएंगे।
उन्होंने दावा किया कि तीन वर्ष पहले भी वे बोराह का स्वागत करने और उन्हें सुरक्षित सीट देने को तैयार थे।
सरमा ने यह भी आरोप लगाया कि जब से उन्होंने गौरव गोगोई के पाकिस्तान से संबंध होने का मुद्दा उठाया है, तब से कांग्रेस के कई जमीनी स्तर के नेता उनके संपर्क में हैं।
उन्होंने भविष्यवाणी की कि अगले पखवाड़े में पांच और विधायक दल बदल सकते हैं।
कांग्रेस की स्थिति पर सवाल
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि असम में कांग्रेस की स्थिति बेहद कमजोर है।
उन्होंने आरोप लगाया कि उम्मीदवार चयन के लिए पर्यवेक्षकों की तैनाती और पार्टी के अंदरूनी हालात गंभीर स्थिति को दर्शाते हैं।
सरमा ने यह भी कहा कि बोराह का इस्तीफा एक प्रतीकात्मक संदेश है कि कांग्रेस राज्य में अपना आधार खो रही है।
32 साल का सफर और इस्तीफे की वजह
इस्तीफे के बाद भूपेन बोराह ने कहा,
“मैंने आज सुबह कांग्रेस हाईकमान को अपना इस्तीफा भेजा और विस्तार से बताया कि मुझे यह कदम क्यों उठाना पड़ा। यह कोई व्यक्तिगत निर्णय नहीं है। मैंने 1994 में पार्टी जॉइन की थी और 32 साल तक सेवा दी है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका फैसला व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से प्रेरित नहीं, बल्कि पार्टी के भविष्य को लेकर चिंता के कारण लिया गया है।
असम चुनाव से पहले भूपेन बोराह का इस्तीफा कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि पार्टी इस संकट से कैसे उबरती है और आने वाले चुनाव में इसका क्या असर पड़ता है।