लखनऊ। इस्लाम का सहारा लेकर लव जिहाद चलाने वाले कुछ मुस्लिम युवा पुलिस और न्यायपालिका को धोखा देने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाते रहते हैं। हाल ही में, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने धर्म छिपाकर शादी करने और दुराचार करने के आरोप में दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया।
इस लव जिहाद प्रकरण में अभियुक्त, जिसे तथाकथित पति बताया जा रहा है, का दावा था कि उसने 2009 में इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपना लिया था और इसके बाद पीड़िता से आर्य समाज मंदिर में विवाह किया। लेकिन न्यायालय ने देखा कि अभियुक्त के आधार कार्ड पर उसका नाम “आरिफ हुसैन” लिखा हुआ है।
न्यायालय ने अभियुक्त के अधिवक्ता से सवाल किया कि यदि उसने सनातन धर्म अपनाया है, तो उसका नाम अब भी आरिफ हुसैन क्यों है। जब अधिवक्ता संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए, तो न्यायालय ने याचिका को खारिज कर दिया।
न्यायालय ने पुलिस को यह निर्देश दिया कि वह इस बात की भी जांच करे कि क्या अभियुक्त ने “आरिफ हुसैन” नाम से आधार कार्ड बनवाकर कोई अन्य अपराध भी किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति एनके जौहरी की खंडपीठ ने आरिफ हुसैन उर्फ सोनू सिंह और अन्य की याचिका पर पारित किया। याचियों ने 9 सितंबर 2024 को सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए दलील दी कि याचिका संख्या एक और पीड़िता का विवाह 24 जनवरी 2009 को आर्य समाज मंदिर अलीगंज में हुआ था।
याचिका में यह भी कहा गया कि 15 वर्ष बाद पीड़िता ने एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि याचिका संख्या एक ने धर्म छिपाकर उससे विवाह किया और उसके साथ दुराचार किया।
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप गंभीर हैं, इसलिए इसे खारिज नहीं किया जा सकता।