कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे “पहाड़ियों के लिए मौत का वारंट” बताया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और नई परिभाषा
20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा को स्वीकार किया।
अब 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियां खनन प्रतिबंधों के अधीन नहीं होंगी।
कांग्रेस ने इसे अवैध खनन और माफियाओं को लगभग खुले आम नष्ट करने का निमंत्रण करार दिया।
गांधी की चिंता और पर्यावरणीय प्रभाव
उन्होंने सरकारी नीतियों में पर्यावरण के प्रति गहरी उपेक्षा की ओर ध्यान आकर्षित किया।
वनों की कटाई और स्थानीय समुदायों को जंगलों से बेदखल करना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के उल्लंघन के रूप में बताया।
नीतिगत बदलाव की मांग
कांग्रेस नेता ने केंद्र से वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 और वन संरक्षण नियम, 2022 में किए गए संशोधनों को वापस लेने का अनुरोध किया।
सुप्रीम कोर्ट की पिछली कार्रवाई
पूर्व CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार अरावली पहाड़ियों की परिभाषा स्वीकार की।
अदालत ने सतत और अवैध खनन रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की सिफारिशों को भी मंजूरी दी।