तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार ने आसानी से विश्वास मत हासिल कर लिया, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया ने राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी AIADMK को बड़े राजनीतिक संकट में डाल दिया।
जो फ्लोर टेस्ट विजय सरकार की ताकत दिखाने के लिए था, वह अंततः AIADMK के भीतर गहरे विभाजन और नेतृत्व संघर्ष को उजागर कर गया।
विजय सरकार ने हासिल किया मजबूत बहुमत
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 विधायकों के समर्थन की जरूरत थी।
मुख्यमंत्री विजय की TVK सरकार ने 144 विधायकों का समर्थन हासिल कर विश्वास मत जीत लिया। यह जीत उम्मीद से कहीं बड़ी मानी जा रही है।
हालांकि राजनीतिक चर्चा सरकार की जीत से ज्यादा AIADMK के भीतर मचे घमासान पर केंद्रित रही।
EPS के लिए ‘एकता की परीक्षा’ बन गया फ्लोर टेस्ट
AIADMK प्रमुख Edappadi K. Palaniswami (EPS) ने दावा किया था कि उनकी पार्टी के सभी विधायक विजय सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे।
लेकिन फ्लोर टेस्ट ने यह साफ कर दिया कि पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा उनके नेतृत्व से असहमत है।
असल में यह मतदान विजय सरकार से ज्यादा AIADMK की आंतरिक एकता की परीक्षा बन गया।
चुनाव नतीजों के बाद बढ़ी अंदरूनी खींचतान
4 मई को आए विधानसभा चुनाव परिणामों में TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।
वहीं M. K. Stalin के नेतृत्व वाली DMK को 59 सीटें मिली थीं, जबकि AIADMK 47 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही।
चुनाव परिणाम आने के कुछ ही दिनों बाद AIADMK के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ने लगा।
SP वेलुमणि गुट बना EPS के लिए चुनौती
AIADMK के वरिष्ठ नेता एस.पी. वेलुमणि के नेतृत्व में पार्टी के लगभग 30 विधायकों ने अलग रुख अपना लिया।
इन विधायकों ने मंगलवार को वेलुमणि को अपना नेता घोषित किया और मुख्यमंत्री विजय को समर्थन देने के संकेत दिए।
इस घटनाक्रम ने EPS की पकड़ को कमजोर कर दिया और पार्टी में दो फाड़ होने का खतरा पैदा हो गया।
DMK से समझौते के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किल
बागी गुट के नेता शनमुगम ने आरोप लगाया कि EPS, अपने पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी DMK के साथ समझौता कर सरकार बनाने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि AIADMK की स्थापना ही DMK का विरोध करने के लिए हुई थी और पार्टी के विधायक इस विचार से सहमत नहीं थे।
इन आरोपों ने पार्टी के भीतर असंतोष को और गहरा कर दिया।
AIADMK ने बागी गुट पर बोला हमला
AIADMK नेतृत्व ने बागी विधायकों पर पार्टी और मतदाताओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया।
पार्टी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि कुछ नेता झूठ फैला रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं की भावना के खिलाफ काम कर रहे हैं।
AIADMK ने यह भी कहा कि पार्टी केवल कुछ विधायकों की नहीं, बल्कि लाखों कार्यकर्ताओं का आंदोलन है।
EPS ने लगाए ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोप
विधानसभा में बोलते हुए EPS ने आरोप लगाया कि AIADMK विधायकों को विजय सरकार के पक्ष में वोट देने के लिए नकद राशि की पेशकश की गई।
उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि विधायकों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।
AIADMK के सामने अस्तित्व का संकट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट केवल फ्लोर टेस्ट तक सीमित नहीं है।
असल चुनौती अब AIADMK के भविष्य और नेतृत्व को लेकर है। यदि पार्टी के भीतर विभाजन और बढ़ता है, तो तमिलनाडु की राजनीति में AIADMK की स्थिति कमजोर हो सकती है।
वहीं विजय सरकार की मजबूत शुरुआत ने राज्य की राजनीति में नए शक्ति संतुलन के संकेत भी दे दिए हैं।