पद्म पुराण के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत करने से एक हजार गायों का दान करने और अश्वमेध यज्ञ कराने के बराबर फल मिलता है। यह व्रत सभी पापों का नाश करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
राजा हरिश्चंद्र की कथा के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से उन्होंने अपना खोया हुआ राज्य और परिवार पुनः प्राप्त किया था। इसलिए, भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से व्रत करने से दुख और परेशानियाँ दूर होती हैं तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।
अजा एकादशी 2025: भगवान विष्णु पूजन
अजा एकादशी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। इस दिन भगवान विष्णु के ऋषिकेश स्वरूप की पूजा की जाती है। यह व्रत अश्वमेध यज्ञ के समान फलदायी और समस्त पापों का नाश करने वाला माना जाता है।
अजा एकादशी व्रत और पूजा विधि
व्रत का संकल्प
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
पूजा की तैयारी
गंगाजल से घर को शुद्ध करें और चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
पूजा विधि
भगवान विष्णु को गंगाजल से स्नान कराएं, फिर पीले वस्त्र, फूल, अक्षत, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें।
मंत्र जाप और कथा
पूजन के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” मंत्र का जाप करें और अजा एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें।
रात्रि जागरण और दान
दिन में सोने से बचें, रात्रि में भजन-कीर्तन करें और अगले दिन द्वादशी को पारण से पहले गरीबों को दान दें।
खुशहाली के लिए उपाय
तुलसी और दीपक: शाम को तुलसी के पौधे और मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं, इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
केसर और दूध: भगवान विष्णु को केसर युक्त गाय का दूध अर्पित करें, इससे नकारात्मकता दूर होती है।
पीले चंदन का तिलक: माथे पर पीले चंदन या केसर का तिलक लगाएं, यह आर्थिक संकट दूर करता है।
गाय को भोजन: घी लगी रोटी और गुड़ खिलाएं, इससे करियर और कार्यों में सफलता मिलती है।
संतान से जुड़ी समस्या: पीले फूलों की माला भगवान विष्णु को अर्पित करें और उनसे संतान सुख हेतु प्रार्थना करें।