न्यूयॉर्क की अदालत ने उद्योगपति गौतम अडानी और अन्य के खिलाफ चल रहे तीन मामलों को एक साथ जोड़ने का निर्देश दिया है। ये मामले 265 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 2,029 करोड़ रुपये) की रिश्वत के आरोपों से जुड़े हैं। अदालत ने कहा कि मामलों में समान आरोप और लेनदेन शामिल हैं, इसलिए इन्हें संयुक्त सुनवाई के लिए जोड़ा गया है।
किन मामलों को जोड़ा गया?
यूएस बनाम अडानी और अन्य (आपराधिक मामला)
एसईसी बनाम अडानी और अन्य (सिविल मामला)
एसईसी बनाम कैबनेस (सिविल मामला)
संयुक्त सुनवाई का कारण
अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक दक्षता बढ़ाने और परस्पर विरोधाभासी प्रक्रियाओं से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया। सभी मामले अब जिला न्यायाधीश निकोलस जी गारौफिस को सौंपे गए हैं, जो अडानी के खिलाफ आपराधिक मामले की देखरेख कर रहे हैं।
रिश्वत के आरोप
अडानी और अन्य पर आरोप है कि उन्होंने राज्य बिजली वितरण कंपनियों के साथ सौर ऊर्जा अनुबंध हासिल करने के लिए 265 मिलियन अमेरिकी डॉलर की रिश्वत दी। अभियोजन पक्ष का दावा है कि यह जानकारी अमेरिकी बैंकों और निवेशकों से छिपाई गई थी, जिनसे धन जुटाया गया।
अडानी समूह का खंडन
अडानी समूह ने इन आरोपों को “निराधार” बताया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा,
“हम एक कानून का पालन करने वाला संगठन हैं और सभी नियमों का पूर्ण पालन करते हैं। अभियोग केवल आरोपों पर आधारित है, और तब तक प्रतिवादियों को निर्दोष माना जाना चाहिए जब तक आरोप साबित न हो जाएं।”
आगे की प्रक्रिया
कोर्ट ने मुकदमों के दोबारा निस्तारण के निर्देश दिए हैं और सभी मामलों की सुनवाई एक साथ की जाएगी।
यह मामला अडानी समूह के लिए एक बड़ी कानूनी चुनौती बन सकता है। आने वाले समय में, संयुक्त सुनवाई के जरिए कोर्ट का फैसला इस विवाद पर निर्णायक साबित होगा।