ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान पर की गई कार्रवाई और उसके जवाब में पाकिस्तान के मिसाइल व ड्रोन हमलों के प्रयास के दौरान भारत की वायु रक्षा प्रणाली ने पहली बार असली युद्ध स्थितियों में अपनी ताकत साबित की। भारत की स्वदेशी ‘आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम’ ने इस परीक्षा में 100 प्रतिशत सफलता प्राप्त की, और अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइलें भारत के सामने तिनके की तरह बिखर गईं। हमारी वायु रक्षा प्रणाली ने उन्हें हवा में ही खत्म कर दिया।”
आकाश मिसाइल सिस्टम : आत्मनिर्भर भारत की मिसाइल शील्ड
15 साल की मेहनत, 500 करोड़ रुपये का खर्च और हज़ारों वैज्ञानिकों की मेहनत से बना आकाश सिस्टम भारत की आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति का प्रतीक बन गया है। यह पहली बार असली युद्ध के हालात में इस्तेमाल किया गया और पूरी तरह सफल रहा। 8 और 9 मई की रात पाकिस्तान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का इसने सफलता से सामना किया। भारतीय वायुसेना के डीजीएमओ एयर मार्शल ए.के. भारती ने कहा, “भारत की वायु रक्षा प्रणाली दीवार की तरह खड़ी रही और दुश्मन की हर कोशिश नाकाम कर दी।”
“मेरी आंखों में आंसू आ गए” – वैज्ञानिक रामाराव
आकाश परियोजना के प्रमुख और पद्मश्री से सम्मानित वैज्ञानिक डॉ. प्रह्लादा रामाराव ने इस सफलता को अपने जीवन का सबसे सुखद दिन बताया। उन्होंने कहा, “जब मेरी संतान (आकाश) ने असली जंग में इतना अच्छा प्रदर्शन किया, तो मेरी आंखों में आंसू आ गए। यह मेरे पद्म पुरस्कार से भी बड़ा है।”
रामाराव ने बताया कि 1994 में इस परियोजना की शुरुआत मात्र 300 करोड़ के बजट से हुई थी, जो बाद में 500 करोड़ हुआ। “दुनिया में कहीं भी इतनी कम लागत में मिसाइल डिफेंस सिस्टम नहीं बना है।” आकाश 70 किमी दूर से लक्ष्य पहचान सकता है और 30 किमी की रेंज में उसे नष्ट कर सकता है।
युद्ध के मैदान में सिद्ध हुई तकनीक
हालांकि आकाश पहले कई परीक्षणों में सफल रहा था, यह पहली बार था जब इसे असली युद्ध स्थिति में इस्तेमाल किया गया। भारतीय सेना और वायुसेना ने इसे पश्चिमी सीमा पर रणनीतिक रूप से तैनात किया है। इसकी विशेषता है – मल्टी-सेंसर डेटा प्रोसेसिंग, रीयल टाइम खतरे का आकलन, और किसी भी दिशा से आने वाले लक्ष्यों को एक साथ नष्ट करने की क्षमता।
आकाश के वेरिएंट और अंतरराष्ट्रीय भरोसा
2009 में विकसित होने के बाद आकाश प्रणाली में कई वेरिएंट्स जोड़े गए हैं, जैसे:
आकाश Mark-I
अपग्रेडेड आकाश-1S (स्वदेशी सीकर सहित)
आकाश प्राइम (कम तापमान व ऊंचाई पर सक्षम)
आकाश-NG (लंबी दूरी व आधुनिक विशेषताओं के साथ)
भारतीय वायुसेना ने अब तक 15 स्क्वॉड्रन और थल सेना 4 रेजीमेंट तैनात की हैं। आगे और खरीद की योजना है।
वैश्विक विश्वास : आर्मेनिया ने की आकाश की खरीद
2022 में आर्मेनिया ने 6,000 करोड़ रुपये की डील में 15 आकाश मिसाइल सिस्टम खरीदे, और भारत ने पहली खेप पिछले साल भेज दी। इससे भारत की रक्षा निर्यात क्षमताओं को भी बड़ा प्रोत्साहन मिला है।