अमेरिका ने भारत सहित 60 व्यापारिक साझेदार देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर नई टैरिफ व्यवस्था लागू कर दी है। नई नीति के तहत भारत पर 10 प्रतिशत सेक्शन-301 शुल्क लगाया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के अनुसार यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया गया है, जो कथित तौर पर जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त और प्रभावी प्रतिबंध लागू नहीं कर रहे हैं।
24 जुलाई से लागू हुई नई टैरिफ व्यवस्था
नई टैरिफ व्यवस्था 24 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है। यह शुल्क अमेरिका के पहले लागू अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ की जगह लेता है, जिसकी अवधि अब समाप्त हो चुकी है।
भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, ब्रिटेन, कनाडा, मेक्सिको और श्रीलंका समेत कुल 17 अर्थव्यवस्थाओं को 10 प्रतिशत टैरिफ श्रेणी में रखा गया है। वहीं, कई अन्य देशों पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है।
भारत को क्यों मिला 10% टैरिफ?
यूएसटीआर के मुताबिक, भारत उन देशों में शामिल है जिन्होंने जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों पर नियंत्रण के लिए कुछ नीतिगत कदम उठाए हैं। इसी वजह से भारत को अधिकतम 12.5 प्रतिशत के बजाय 10 प्रतिशत टैरिफ श्रेणी में रखा गया है।
इन उत्पादों को मिलेगी टैरिफ से छूट
नई व्यवस्था सभी वस्तुओं पर लागू नहीं होगी। कई महत्वपूर्ण उत्पादों को इस शुल्क से बाहर रखा गया है, जिनमें शामिल हैं—
तेल और गैस
उर्वरक
कुछ खाद्य उत्पाद
विमान और विमान के कलपुर्जे
महत्वपूर्ण खनिज
पहले से अमेरिकी सुरक्षा शुल्क के दायरे में आने वाले कुछ उत्पाद
भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन भारतीय उत्पादों को टैरिफ से छूट नहीं मिलेगी, वे अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और लाभ मार्जिन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
सरकार और उद्योग जगत के सामने नई चुनौती
नई टैरिफ व्यवस्था के बाद भारत सरकार और उद्योग जगत के लिए अमेरिकी प्रशासन के साथ बातचीत कर अधिक छूट, स्पष्ट नियम और व्यापारिक राहत हासिल करना अहम होगा। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताओं पर भी इस फैसले का असर देखने को मिल सकता है।