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गिग वर्कर्स हड़ताल: 10 मिनट डिलीवरी पर सवाल, Zomato CEO ने दी सफाई

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31 दिसंबर को गिग वर्कर यूनियनों द्वारा हड़ताल के ऐलान के बाद अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी मॉडल एक बार फिर चर्चा में आ गया। हालांकि नए साल की पूर्व संध्या पर ज़ोमैटो और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर डिलीवरी सेवाओं पर खास असर नहीं दिखा, लेकिन 10 मिनट की डिलीवरी राइडर्स पर दबाव डालती है या नहीं, इस सवाल ने सोशल मीडिया पर जोर पकड़ लिया।

10 मिनट की डिलीवरी पर Zomato CEO की सफाई

इन सवालों का जवाब देते हुए ज़ोमैटो के फाउंडर और CEO दीपेंद्र गोयल ने X (पूर्व में ट्विटर) पर कई पोस्ट साझा किए। उन्होंने कहा कि 10 मिनट की डिलीवरी को लेकर की जा रही आलोचना अक्सर सिस्टम की गलत समझ पर आधारित होती है।

कैसे काम करता है 10 मिनट का डिलीवरी मॉडल

गोयल के मुताबिक, डिलीवरी की रफ्तार राइडर्स पर दबाव डालकर नहीं, बल्कि माइक्रो-इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टोर डेंसिटी के जरिए हासिल की जाती है।
उन्होंने लिखा,
“10 मिनट की डिलीवरी आपके आसपास मौजूद स्टोर्स की वजह से संभव होती है, न कि डिलीवरी पार्टनर्स को तेज़ चलाने के लिए कहकर।”

डिलीवरी पार्टनर्स को नहीं दिखता तय समय

गोयल ने स्पष्ट किया कि डिलीवरी पार्टनर्स के ऐप में कोई टाइमर या डेडलाइन दिखाई ही नहीं देती।
उनके अनुसार,
“राइडर्स को यह भी नहीं पता होता कि ग्राहक से क्या समय का वादा किया गया है।”

ऑर्डर से डिलीवरी तक की पूरी प्रक्रिया

प्रक्रिया समझाते हुए गोयल ने बताया:

ऑर्डर मिलने के 2.5 मिनट के भीतर पिक और पैक

राइडर औसतन 8 मिनट में 2 किमी से कम दूरी तय करता है

औसत रफ्तार लगभग 15 किमी प्रति घंटा

उन्होंने कहा कि तेज़ डिलीवरी को सीधे जोखिम भरे व्यवहार से जोड़ना सिस्टम की जटिलता को नजरअंदाज़ करना है।

क्या 10 मिनट की डिलीवरी असुरक्षित है?

गोयल ने माना कि बाहर से देखने पर यह मॉडल खतरनाक लग सकता है।
उन्होंने लिखा,
“मैं समझता हूं कि लोग क्यों सोचते हैं कि 10 मिनट में डिलीवरी जान जोखिम में डालने जैसा है, क्योंकि इस सिस्टम के डिजाइन को समझना आसान नहीं है।”

क्या डिलीवरी पार्टनर्स को इंश्योरेंस मिलता है?

वर्कर सेफ्टी को लेकर उठे सवालों पर गोयल ने कहा कि:

सभी डिलीवरी पार्टनर्स के पास मेडिकल और लाइफ इंश्योरेंस है

समय पर डिलीवरी न होने पर कोई सजा या पेनल्टी नहीं लगती

उन्होंने लिखा,
“हम समझते हैं कि कई बार चीजें गलत हो जाती हैं।”

करियर ग्रोथ पर CEO का साफ रुख

डिलीवरी जॉब में लॉन्ग-टर्म करियर को लेकर गोयल ने कहा कि गिग वर्क को परमानेंट नौकरी के रूप में डिज़ाइन नहीं किया गया है।
उन्होंने लिखा,
“बिना स्किल वाली नौकरी में करियर ग्रोथ? यह किसी के लिए भी स्थायी नौकरी नहीं है।”

क्यों छोड़ते हैं लोग गिग वर्क?

गोयल के अनुसार:

ज़्यादातर लोग यह काम कुछ महीनों के लिए करते हैं

फिर वे किसी अधिक स्थायी काम की ओर बढ़ जाते हैं

एक साल में 65% एट्रिशन रेट इस बात को साबित करता है कि यह वाकई ‘गिग’ जॉब है

हायरिंग स्टैंडर्ड्स पर भी सफाई

CEO ने बताया कि गिग में काम करने के लिए:

वैध ड्राइविंग लाइसेंस

क्लियर बैकग्राउंड चेक
ज़रूरी होता है।

गिग इकोनॉमी की आलोचना पर जवाब

गोयल ने माना कि गिग वर्क को लेकर धारणा अक्सर नकारात्मक होती है।
उन्होंने लिखा,
“अगर मैं सिस्टम के बाहर होता, तो शायद मैं भी यही सोचता कि गिग वर्कर्स का शोषण हो रहा है, लेकिन यह सच नहीं है।”

राइडर्स से बात करने की अपील

उन्होंने ग्राहकों से अपील की कि वे डिलीवरी पार्टनर्स से सीधे बात करें ताकि समझ सकें कि लाखों लोग अपनी मर्ज़ी से प्लेटफॉर्म पर काम क्यों करते हैं और कई बार रेगुलर नौकरी के बजाय इसे चुनते हैं।

सुधार की गुंजाइश भी मानी

गोयल ने स्वीकार किया कि सिस्टम परफेक्ट नहीं है।
उन्होंने लिखा,
“कोई भी सिस्टम परफेक्ट नहीं होता और हम इसे लगातार बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”

हड़ताल के बावजूद सेवाओं पर सीमित असर

यह बयान गिग वर्कर यूनियनों द्वारा 25 और 31 दिसंबर को हड़ताल के आह्वान के कुछ दिन बाद आया है। यूनियनों ने बेहतर वेतन, सोशल सिक्योरिटी और सुरक्षित कामकाजी हालात की मांग की थी।
हालांकि, शहरों में यूज़र्स के अनुभव बताते हैं कि नए साल की पूर्व संध्या पर डिलीवरी सेवाएं largely सामान्य रहीं।

बहस अभी जारी

इसके बावजूद, डिलीवरी टाइमलाइन, वर्कर सेफ्टी और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर बहस तेज़ हो गई है। दीपेंद्र गोयल की टिप्पणियों ने इस मुद्दे पर कंपनी का पक्ष सामने रखा है, जो आने वाले दिनों में भी चर्चा में बना रह सकता है।

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