यदि आप परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, तो इस दिन विशेष चीजों का दान अवश्य करना चाहिए। मान्यता है कि इससे जीवन में कष्ट नहीं आते और हमेशा खुशहाली बनी रहती है।
परिवर्तिनी एकादशी 2025 दान नियम
सनातन धर्म में वर्षभर अनेक एकादशियां आती हैं और हर एकादशी का अपना महत्व होता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। इसे जलझूलनी ग्यारस और पद्मा एकादशी भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं और चार माह की योगनिद्रा से जागकर जगत का कल्याण करते हैं। इस कारण इसे अत्यंत शुभ और पुण्यकारी तिथि माना गया है।
दान का महत्व
दान करना सनातन धर्म की सबसे बड़ी परंपरा है। माना जाता है कि अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेषकर एकादशी का व्रत तभी पूर्ण माना जाता है जब अंत में दान और ब्राह्मण भोजन कराया जाए।
परिवर्तिनी एकादशी पर क्या करें दान?
अन्न और अनाज का दान
अन्न को भगवान विष्णु का प्रतीक माना गया है। इस दिन चावल, गेहूं, दाल और आटा दान करने से घर में अन्न की कमी नहीं होती और गरीबों को लाभ मिलता है।
वस्त्र का दान
साफ-सुथरे या नए वस्त्र दान करने से पितृ दोष शांत होता है और परिवार में शांति बनी रहती है। यह दान विशेषकर ब्राह्मण, विधवा या असहाय लोगों को करना शुभ है।
बर्तन और उपयोगी सामान
स्टील, तांबे या पीतल के बर्तन दान करने से घर में लक्ष्मी का वास होता है और जीवन में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
तिल और गुड़ का दान
तिल और गुड़ को पवित्र माना जाता है। इनके दान से स्वास्थ्य लाभ होता है, ग्रहदोष दूर होते हैं और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी प्रसन्न होते हैं।
फल और मिठाई का दान
मौसमी फल और मिठाई दान करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है, पाप नष्ट होते हैं और घर में खुशियां आती हैं।
दीपक और घी का दान
घी और दीपक का दान करने से जीवन का अंधकार दूर होता है और सुख-समृद्धि आती है।
धन का दान
जरूरतमंद लोगों को धन दान करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और दरिद्रता दूर होती है।
दान करने के नियम
दान हमेशा श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से करें।
दान किसी योग्य ब्राह्मण, साधु, गरीब या असहाय व्यक्ति को दें।
दान देने के बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय“ मंत्र का जप करना शुभ होता है।
मान्यता और फल
परिवर्तिनी एकादशी केवल उपवास और पूजा के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह दान-पुण्य का भी विशेष दिन है।
इस दिन यदि श्रद्धापूर्वक अन्न, वस्त्र, बर्तन, फल, तिल-गुड़ और धन का दान किया जाए, तो घर में खुशियां, समृद्धि और सौभाग्य स्थायी रूप से निवास करते हैं। साथ ही, यह दान पितरों को तृप्त करता है और भगवान विष्णु की कृपा सदैव बनी रहती है।