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“पहलगाम हमले के बाद फूलों की घाटी में ATS तैनात”

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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर उत्तराखंड सरकार सतर्क हो गई है। इसी क्रम में उत्तराखंड पुलिस ने फूलों की घाटी के प्रवेश द्वार घांघरिया में 6 सदस्यीय एंटी टेरर स्क्वॉड (ATS) की तैनाती की है। यह पहली बार है जब इस क्षेत्र में एटीएस को तैनात किया गया है।

हेमकुंड साहिब यात्रा पर विशेष नजर

चमोली के पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार ने बताया कि यह टीम 24 मई से वहां तैनात है और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के साथ मिलकर फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।

राज्यभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

हालांकि कोई प्रत्यक्ष खतरा सामने नहीं आया है, लेकिन फूलों की घाटी जैसे संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। चारधाम यात्रा स्थलों – यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में भी पुलिस बल तैनात किया गया है। साथ ही सोशल मीडिया पर निगरानी और उत्तराखंड में रह रहे करीब 1,700 कश्मीरी छात्रों को सहयोग भी दिया जा रहा है।

फूलों की घाटी: प्राकृतिक धरोहर

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान, जो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, 1 जून को पर्यटकों के लिए खुल चुका है। समुद्र तल से 9,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र जून से अक्टूबर तक खुला रहता है और इसमें 600 से अधिक फूलों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जैसे ब्रह्मकमल, हिमालयन ब्लू पॉपी आदि।

कैसे पहुंचे फूलों की घाटी?

यह घाटी गोविंदघाट से 13 किमी ट्रेक कर घांघरिया पहुंचने के बाद, वहाँ से 3-4 किमी के पैदल मार्ग पर स्थित है। यही घांघरिया अब एटीएस की निगरानी में है।

हेमकुंड साहिब भी है पास

फूलों की घाटी के समीप स्थित हेमकुंड साहिब, सिख धर्म का पवित्र स्थल है, जिसे 25 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। हर साल हजारों श्रद्धालु यहाँ पहुंचते हैं।

इको-जोन में सख्त नियम

फूलों की घाटी एक संवेदनशील इको-जोन में आती है, जहां प्लास्टिक प्रतिबंध, शोर पर नियंत्रण और सीमित प्रवेश जैसी सख्त पर्यावरणीय व्यवस्थाएं लागू हैं, ताकि इसकी जैव विविधता सुरक्षित रहे।

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