सेना प्रमुख (सीओएएस) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि 10 मई को पाकिस्तानी क्षेत्र में नौ आतंकी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाकर शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पश्चिमी मोर्चे और जम्मू-कश्मीर की स्थिति संवेदनशील जरूर है, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है।
आतंकी भर्ती लगभग नगण्य, स्थानीय आतंकवाद कमजोर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनरल द्विवेदी ने बताया कि वर्ष 2025 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी भर्ती लगभग न के बराबर रही है। पूरे साल में केवल दो नई भर्तियां हुईं। सक्रिय स्थानीय आतंकवादियों की संख्या अब एकल अंकों में सिमट गई है, जो सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
2025 में 31 आतंकवादी ढेर, 65% पाकिस्तानी मूल के
सेना प्रमुख के अनुसार, 2025 में सुरक्षा बलों ने 31 आतंकवादियों को मार गिराया, जिनमें से करीब 65 प्रतिशत पाकिस्तानी मूल के थे। इनमें पहलगाम हमले के तीन आतंकी भी शामिल हैं, जिन्हें ऑपरेशन महादेव के तहत ढेर किया गया।
जम्मू-कश्मीर में दिख रहे सकारात्मक बदलाव
जनरल द्विवेदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सकारात्मक बदलाव के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। विकास कार्यों में तेजी आई है, पर्यटन का पुनरुद्धार हुआ है और शांतिपूर्ण श्री अमरनाथ यात्रा इसका उदाहरण है। इस वर्ष चार लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने यात्रा में भाग लिया, जो पिछले पांच वर्षों के औसत से कहीं अधिक है। आतंकवाद से पर्यटन की ओर बदलाव धीरे-धीरे आकार ले रहा है।
पूर्वोत्तर की सुरक्षा पर विशेष नजर
सेना प्रमुख ने म्यांमार में जारी अशांति के संभावित दुष्प्रभावों से पूर्वोत्तर को सुरक्षित रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि असम राइफल्स, सेना और गृह मंत्रालय मिलकर एक बहु-एजेंसी सुरक्षा ग्रिड के तहत काम कर रहे हैं, ताकि म्यांमार की घटनाओं का असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर न पड़े।
म्यांमार में चुनावों के बाद सहयोग की उम्मीद
जनरल द्विवेदी ने कहा कि म्यांमार में दूसरे चरण के चुनावों के सफल आयोजन के बाद अब दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग और अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।