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Extra-Marital Apps पर 40 लाख भारतीय, बेंगलुरु सबसे आगे

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भारत, जहां शादी को एक पवित्र संस्था माना जाता है, वहां अब रिश्तों की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक्स्ट्रा-मैरिटल डेटिंग ऐप Gleeden के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, देश में इसके यूज़र्स की संख्या 40 लाख (4 मिलियन) के पार पहुंच चुकी है।

सबसे ज्यादा यूज़र्स बेंगलुरु (18%) में हैं, जिसके बाद हैदराबाद, दिल्ली और मुंबई का स्थान आता है। अब यह ट्रेंड केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लखनऊ, सूरत, पटना और गुवाहाटी जैसे शहरों में भी तेजी से फैल रहा है।

रिश्तों के नजरिए में बदलाव

यह बदलाव सिर्फ एक ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में रिश्तों को लेकर बदलती सोच को दर्शाता है।
2024 में Gleeden द्वारा 25–50 वर्ष के 1,503 शादीशुदा लोगों पर किए गए सर्वे में पाया गया कि:

60% से अधिक लोग पारंपरिक रिश्तों से अलग विकल्पों को अपनाने लगे हैं

ओपन रिलेशनशिप और अन्य आधुनिक संबंधों को लेकर स्वीकार्यता बढ़ रही है

इसी तरह, Ashley Madison के अनुसार, कांचीपुरम भी अफेयर के मामलों में तेजी से उभरता केंद्र बन रहा है।

लोगों के अनुभव क्या कहते हैं?

मुंबई की एक मार्केटिंग प्रोफेशनल (बदला हुआ नाम) के अनुसार,“अब ऐसे रिश्ते छिपे नहीं रहे, कई मामलों में दोनों पार्टनर को इसकी जानकारी होती है और ‘ओपन मैरिज’ का चलन बढ़ रहा है।

वहीं, एक अन्य प्रोफेशनल (अनिरुद्ध) मानते हैं कि वे ऐसे ऐप्स का इस्तेमाल “रोमांच और नए अनुभव” के लिए करते हैं।

यूज़र्स का व्यवहार और पैटर्न

Gleeden के डेटा के अनुसार:

65% यूज़र्स पुरुष और 35% महिलाएं हैं

महिलाओं की भागीदारी में पिछले 2 साल में 148% की वृद्धि हुई

यूज़र्स रोज़ाना 1–1.5 घंटे चैटिंग में बिताते हैं

सबसे सक्रिय समय:

दोपहर 12 से 3 बजे

रात 10 बजे से आधी रात

पसंद का पैटर्न:

पुरुष: 25–30 वर्ष की महिलाएं

महिलाएं: 30–40 वर्ष के स्थापित प्रोफेशनल पुरुष

मेट्रो शहरों से आगे बढ़ता ट्रेंड

शहरों के अनुसार यूज़र प्रतिशत:

बेंगलुरु – 18%

हैदराबाद – 17%

दिल्ली – 11%

मुंबई – 9%

पुणे – 7%

इसके अलावा लखनऊ, चंडीगढ़, सूरत, कोयंबटूर, पटना और गुवाहाटी जैसे शहरों में भी तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

महिला यूज़र्स की संख्या में तेज़ वृद्धि इस बात का संकेत है कि:

महिलाएं अब अपने निजी फैसले खुद लेने में अधिक सक्षम महसूस कर रही हैं

प्लेटफॉर्म पर महिलाओं को फ्री एक्सेस मिलने से भी संतुलन बढ़ा है

लेकिन यह सवाल भी उठता है—
क्या यह बदलाव सशक्तिकरण का संकेत है या रिश्तों में अधूरी भावनात्मक जरूरतों का परिणाम?

Gleeden की कंट्री मैनेजर के अनुसार, यह एक “खामोश क्रांति” है, जो दिखाती है कि लोग अब रिश्तों को नए नजरिए से देख रहे हैं।

भले ही समाज में इस पर बहस जारी रहे, लेकिन आंकड़े साफ बताते हैं कि भारत में रिश्तों की परिभाषा धीरे-धीरे बदल रही है।

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