प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की एक सप्ताह लंबी यात्रा पर रवाना हुए। इस दौरान वह जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और विभिन्न वैश्विक तथा द्विपक्षीय मुद्दों पर विश्व नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और रणनीतिक साझेदारियों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
रवाना होने से पहले क्या बोले PM मोदी?
यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एक बयान जारी कर कहा कि भारत की रणनीतिक दृष्टि में फ्रांस का विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि फ्रांस और भारत के बीच संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देश कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि स्लोवाकिया की उनकी यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी और इससे आपसी सहयोग को नई गति मिलेगी।
राष्ट्रपति मैक्रों से होगी अहम बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसी वर्ष फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आए थे, जहां दोनों देशों ने अपने संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया था।
उन्होंने कहा, “जब मैं नीस में राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात करूंगा, तब फरवरी के बाद हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और भविष्य के सहयोग की नई रूपरेखा तैयार करेंगे।”
प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों नेता रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और अन्य महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।
स्लोवाकिया यात्रा होगी ऐतिहासिक
प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाकिया यात्रा कई मायनों में खास मानी जा रही है। वर्ष 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा होगी।
अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना है।
G7 समिट में भारत की बढ़ती अहमियत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती प्रतिष्ठा और प्रभाव को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि यह लगातार आठवां अवसर है जब भारत को जी-7 सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह भारत के प्रति प्रमुख वैश्विक शक्तियों के विश्वास को दर्शाता है।
‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बनेगा भारत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत जी-7 शिखर सम्मेलन में केवल अपने राष्ट्रीय हितों की बात नहीं करेगा, बल्कि विकासशील देशों और ‘ग्लोबल साउथ’ की आकांक्षाओं को भी मजबूती से दुनिया के सामने रखेगा।
उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक शांति, आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर सार्थक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कई वैश्विक मुद्दों पर होगी चर्चा
जी-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी विभिन्न देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, भू-राजनीतिक चुनौतियां, ऊर्जा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहेंगे।
भारत की यह यात्रा न केवल उसके अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका को भी और अधिक प्रभावशाली बनाएगी।