बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच बुधवार, 20 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। महंगाई बढ़ने की आशंकाओं और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया।
सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुले
शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला BSE Sensex 394.36 अंक यानी 0.52 प्रतिशत गिरकर 74,806.49 पर खुला।
वहीं NIFTY 50 160.75 अंक टूटकर 23,457.25 के स्तर पर पहुंच गया।
पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 75,200.85 और निफ्टी 23,618 पर बंद हुआ था।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट
बाजार में बिकवाली का असर व्यापक सूचकांकों पर भी देखने को मिला।
BSE मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स 92.19 अंक गिरा
BSE स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स 42.83 अंक यानी 0.51 प्रतिशत टूटकर 8,320.79 पर पहुंच गया
किन शेयरों में रही तेजी और गिरावट?
सेंसेक्स के कुछ चुनिंदा शेयरों में मजबूती देखने को मिली।
हरे निशान में कारोबार करने वाले प्रमुख शेयर:
Bharti Airtel
Sun Pharmaceutical Industries
Tata Consultancy Services
इनमें भारती एयरटेल करीब 0.65 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा।
वहीं गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे:
Asian Paints
Kotak Mahindra Bank
Bajaj Finance
एशियन पेंट्स में सबसे ज्यादा करीब 1.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
Gift Nifty ने पहले ही दिए थे कमजोर संकेत
Gift Nifty ने बाजार खुलने से पहले ही कमजोर शुरुआत के संकेत दिए थे।
यह 23,565 के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 60.5 अंक गिरकर 23,504.50 पर खुला।
FIIs ने की बिकवाली, DIIs बने खरीदार
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 19 मई को 2,457.49 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 3,801.68 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
SEBI-रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट और Livelong Wealth के संस्थापक हरिप्रसाद के. के अनुसार, बाजार का मूड अभी भी बेहद नाजुक बना हुआ है और आने वाले समय में वैश्विक बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात बाजार की दिशा तय करेंगे।
एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव
एशियाई बाजारों में भी गिरावट का माहौल बना रहा।
जापान का Nikkei 225 890 अंक से ज्यादा टूटा
हांगकांग का Hang Seng Index भी कमजोरी में कारोबार करता दिखा
दक्षिण कोरिया का KOSPI और चीन का SSE Composite Index भी लाल निशान में रहे
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक आर्थिक स्थिति में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।