समाजवादी पार्टी (सपा) ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा फैसला लिया है। खबरों के मुताबिक, पार्टी ने राजनीतिक सलाहकार फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के साथ प्रस्तावित समझौता रद्द कर दिया है।
फैसले की वजह
यह कदम हाल के घटनाक्रमों के बाद उठाया गया है, जिनमें पश्चिम बंगाल चुनाव में TMC का खराब प्रदर्शन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं।
इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा I-PAC निदेशक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है।
करीब था समझौता
सूत्रों के अनुसार, सपा और I-PAC के बीच समझौता लगभग तय हो चुका था।
कंपनी ने पार्टी नेतृत्व के सामने अपना चुनावी खाका भी पेश कर दिया था, लेकिन औपचारिक सहमति नहीं बन पाई।
अखिलेश यादव का रुख
पार्टी सूत्रों का कहना है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव शुरू से ही I-PAC को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे।
बताया जा रहा है कि उन्होंने TMC नेतृत्व के आग्रह पर ही इस प्रस्ताव पर विचार किया था।
I-PAC की स्थिति
I-PAC, जो 2019 से TMC के चुनाव अभियान का प्रबंधन कर रही थी, इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है।
पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान ED ने कोलकाता स्थित इसके कार्यालय पर छापा भी मारा था, जिससे विवाद और बढ़ गया।
प्रशांत किशोर से जुड़ाव
यह फर्म जन सूरज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित की गई थी।
उन्होंने पहले भी कई बड़े नेताओं और दलों के चुनाव अभियानों की रणनीति तैयार की है।
आगे की रणनीति
अब सपा उत्तर प्रदेश चुनाव 2027 के लिए अपनी रणनीति खुद तैयार करने या किसी अन्य विकल्प पर विचार कर सकती है।
पार्टी फिलहाल I-PAC के साथ आगे बातचीत के मूड में नहीं दिख रही है।
I-PAC से दूरी बनाना सपा की चुनावी रणनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी 2027 के चुनावों के लिए किस रणनीति के साथ आगे बढ़ती है।